Thursday, July 2, 2020

दर्द में लिखता हूँ ग़ज़ल।


Shayari gazal poetry story
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स्याही को अपना बनाया,
शब्दों को हमराही,
तब जाकर निकली है,
अच्छी भली एक शायरी।

काव्य में उपजे भाव को,
सम्मान देता है रचयिता,
तब जाकर बनती है,
सुंदर सी एक कविता।

मोहब्बत में पड़ती है,
जब जब कोई खलल,
बना लेते हैं हम भी,
दर्द भरी एक ग़ज़ल।

सबके पास होता है,
कहने को कुछ जवानी में,
फिर किरदार उभरकर आते हैं,
उस शख्स की कहानी में।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, June 30, 2020

मैं ज़िद्दी बहुत था।


Appreciation post





थोड़ा रुका,
फिर चल दिया,
मंज़िल वही रही पर,
रास्ता बदल दिया।
कश्मकश में था तुम्हें,
बता दूँ दिल का हाल,
कहीं फिर से ना,
रास्ता भटक जाऊँ,
इसलिए इरादा बदल दिया।
हर मोड़ पर लोगों ने कोशिश की,
मुझे रोकने की,
मैं ज़िद्दी बहुत था, 
बस मंज़िल की ओर चल दिया।

©नीतिश तिवारी।

Monday, June 29, 2020

दावत-ए-इश्क़ की ख़ातिरदारी।


Dawat-e-ishq







दावत-ए-इश्क़ की ख़ातिरदारी करने वाले,
मोहब्बत की रस्म निभाने को कहते हैं,
गैरों की महफ़िल में हमें बुलाकर,
उन्हीं के सामने हमें आज़माते हैं।

Dawat-e-ishq ki khatirdari karne wale,
Mohabbat ki rasm nibhane ko kahte hain,
Gairon ki mehfil mein humen bulakar,
Unhin ke samane humen aazmate hain.

©नीतिश तिवारी।

Monday, June 15, 2020

क्योंकि खुश रहना है जरूरी...


Reason to be happy
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संसार की मोहमाया के आगे व्यर्थ है ये सुंदर काया। तन स्वस्थ रखना जरूरी है पर उससे भी ज्यादा जरूरी मन की शांति है। अपने आस पास कुछ लोग ऐसे होने चाहिए जिससे आप बिना किसी झिझक के अपने दिल की बात कह सकें।

अवसाद कब आपका दामन थाम ले कुछ कहा नहीं जा सकता। इंसानी दिमाग ऐसा है कि जरा सी परेशानी से हम घबरा जाते हैं और धीरे धीरे यही घबराहट डिप्रेशन का रूप ले लेती है। 

ये वक़्त वाकई बहुत कठिन दौर से गुजर रहा है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम सब खुश रहें और अपने घर परिवार यार दोस्तों का भी ख्याल रखें।
प्रभु सबका कल्याण करें।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, June 9, 2020

आओ करें फिर प्रेम मिलन।


Romantic couple
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पवित्र समय का
प्रेम मिलन
अपराधबोध कैसे हुआ।

जब दोनों की
सहमति थी फिर
ये अवरोध कैसे हुआ।

क्यों मन तेरा लगता नहीं
मेरा भी कुछ अच्छा नहीं
संदेह दृष्टि है लोगों की
हमने तो कुछ गलत किया नहीं।

जीवन मरण के चक्कर से
मुक्त होना है तुम्हें अगर
आओ करें फिर प्रेम मिलन
कब तक रहोगे दूर सजन।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, June 7, 2020

हमसे किया है हमीं पर आज़माना।


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हमसे किया है
हमीं पर आज़माना
मोहब्बत की बातें
किसी और को ना बताना।

चंदा सूरज सब
नाराज़ हो जाएंगे
जब मैं कहूँ तब ही
अपना घूँघट उठाना।

शर्म हया सब तुम्हारे
ही तो गहने हैं
किसी गैर के सामने
यूँ बेवजह ना आना।

मेरे दिल की धड़कन
अब गवाही देती है
वक़्त रहते तुम
सिर्फ मेरा हो जाना।

©नीतिश तिवारी।

Monday, June 1, 2020

खुद को राजा तुम्हें रानी कहूँगा।


खुद को राजा तुम्हें रानी कहूँगा
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प्रेम में साथ दोगी
तो मैं खुद को राजा
और तुम्हें 
अपनी रानी कहूँगा।

अगर जुदा हो गयी
मुझसे तो खुद को
फ़कीर फिर भी
तुम्हें रानी कहूँगा।

मेरा प्रेम इतना कमजोर
नहीं है कि तुम्हें दी हुई
रानी की उपाधि
तुमसे छीन लूँ।

Prem mein saath dogi
Toh main khud ko raja
Aur tumhen
Apni rani kahunga.

Agar juda ho gayi
Mujhse toh khud ko
Fakir phir bhi
Tumhen rani kahunga.

Mera prem itna kamjor
Nahi hai ki tumhen di hui
Rani ki upadhi
Tumse chhin loon.

©नीतिश तिवारी।

Friday, May 29, 2020

मशहूर हूँ तेरे दर्द के कारण।


Dard shayari
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नज़रें तुम्हारी, हुस्न तुम्हारा, और हम पर कत्ल का इल्ज़ाम आया,
झुमकों ने तुम्हारी शरारत की, तब जाकर मयख़ाने में
जाम आया।


Nazren tumhari, husn tumhara, aur hum par qatl ka ilzaam aaya,
Jhumkon ne tumhari shararat ki, tab jakar maykhane mein jaam aaya.

मेरे हर शेर से पहले इरशाद करने वाले,
अब आ भी जाओ हमें बर्बाद करने वाले,
मैं मशहूर हूँ आज तो तेरे दर्द के कारण,
मरहम मत लगाओ ज़िन्दगी आबाद करने वाले।

Mere har sher se pahle irshad karne wale,
Ab aa bhi jaao humen barbaad karne wale,
Main mashhoor hoon aaj to tere dard ke karan,
Marham mat lagao zindagi aabad karne wale.

©नीतिश तिवारी।





Monday, May 25, 2020

इफ्तारी में जाकर तुमने चाँद बदल लिया।


Eid shayari
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बिछड़ गए तुमसे तो क्या, फिर भी हम तुम्हारे रहेंगे,
तमाशा देखने वालों की नज़र में सिर्फ एक नज़ारे रहेंगे,
किसी और की इफ्तारी में जाकर तुमने अपना चाँद बदल लिया,
ईद पर मिलना हमसे, तुम्हारे ही चाँद के बगल में एक सितारे रहेंगे।

Bichhad gaye tumse toh kya, phir bhi hum tumhare rahenge,
Tamasha dekhne walon ki nazar mein sirf ek nazare rahenge,
Kisi aur ki iftaari mein jakar tumne apna chand badal liya,
Eid par milna humse, tumhare hi chand ke bagal mein ek sitare rahenge.

©नीतिश तिवारी।

Friday, May 22, 2020

स्त्री के प्रेम का अस्तित्व।


स्त्री के प्रेम का अस्तित्व
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प्रेम की कविताओं
को पढ़ते वक्त तुम
ढूँढ लेते हो श्रृंगार रस 
के दोनों  प्रकार
संयोग श्रृंगार और 
वियोग श्रृंगार।

बस नहीं ढूँढ पाते तो 
उस प्रेम का अस्तित्व 
जो एक स्त्री तुमसे 
करती है निःस्वार्थ
ये जाने बिना कि उसे 
संयोग मिलेगा या वियोग।

©नीतिश तिवारी।


Thursday, May 21, 2020

आशिक़ मधुशाला से निकलकर।


City of romance paris
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तुम पेरिस, वेनिस
या फिर ज़्यूरिख
चले जाओ।

तुमने हमारे पवित्र
प्रेम पर जो
प्रतिघात किया है
उसकी प्रतिध्वनि
तुम्हें हर जगह
सुनाई देगी।

आशिक़ कभी कभी
मधुशाला से निकलकर
खूबसूरत शहरों में भी
विचरण करते हैं।

©नीतिश तिवारी।

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Monday, May 18, 2020

मजदूर- अपने घर से दूर, वापस लौटने पर क्यों हैं मजबूर?


मजदूर lockdown
Pic credit : google 







ये ऊपर जो तस्वीर आप देख रहे हैं ये यहाँ लगाने का मन तो नहीं था लेकिन यही आज का सच है।

Lockdown 4 की घोषणा हो चुकी है। कुछ दिन और यानी की 31 मई 2020 तक हमें और आपको अपने घरों के अंदर रहना पड़ेगा। हो सकता है कि 31 मई तक आप लूडो के चार गेम और जीत जाएँ। चार नए पकवान बनाना सीख जाएँ या फिर चार नए वेब सीरीज देखकर खत्म कर दें। 

कोरोना जैसी भयंकर महामारी से उत्पन्न हुई परिस्थिति में कुछ लोग घर बैठे बैठे ऊब जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ हमारे मजदूर भाई बहन अपने घर पहुँचने की राह में ही मौत के मुँह में डूब जा रहे हैं। ये बहुत ही अकल्पनीय और हृदयविदारक परिस्थिति है जिसमें मौत कैसे आएगी उसमें भी गरीबी और अमीरी का भेदभाव है। 

इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि अमीरों द्वारा हवाई जहाज़ में लायी गयी मौत, गरीबों के हिस्से रेल की पटरियों पर आई। उन्हीं रेल की पटरियों पर मजदूरों के खून से सनी हुई रोटियाँ हमारे निरंकुश सत्ता में बैठे हुए मठाधीशों को दिखाई नहीं देती। वोट बैंक की राजनीति  के अवसरवादी तराजू में लोगों को तौलने वाले मोतियाबिंद से पीड़ित नेताओं के चश्में पर सत्ता की ऐसी धूल जमी हुई है कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा।

अगर दिखाई दे रहा होता तो एक माँ, ट्रॉली बैग पर सोये हुए बच्चे को खींच कर नहीं ले जा रही होती।
लोकतांत्रिक व्यवस्था की अगर परवाह होती और मोतियाबिंद का चश्मा उतर गया होता तो एक पत्नी अपने पति के अंतिम संस्कार में गाँव जाने के लिए नहीं तड़प रही होती। एक आदमी अपने पूरे परिवार को बैलगाड़ी से खुद एक बैल बने हुए नहीं खींच रहा होता। 



सवाल तो पूछे जाएँगे और जवाब भी देने पड़ेंगे। उन सभी सत्ता के ठेकेदारों से जिनकी जिम्मेदारी थी कि इस संकट की घड़ी में मजदूरों को उनके खाने का इंतजाम किया जाय। अगर दो वक्त की रोटी का इंतज़ाम कर दिया गया होता तो शायद मजदूर अपने गाँव की ओर नहीं जाते। पर क्या करोगे साहब, मजदूर हैं इसलिए पैदल चलने पर मजबूर हैं, NRI होते तो हवाई जहाज़ से लाये जाते। 

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धन्यवाद!

©नीतिश तिवारी।


Sunday, May 17, 2020

तुम अपने प्रेम से मुझे मुक्त होने को कहते हो?



Love romantic poem
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तुम अपने प्रेम से 
मुझे मुक्त होने को 
कहते हो?

तो कह दो उस
आसमाँ से कि
अपनी बारिश की
बूँदों को धरती से
वापस ले जाए।

तो कह दो समंदर
से मिलकर पूरी
हुई नदी से कि
वो अपनी धार को
समंदर से खींचकर
फिर से आधी हो जाए।

तुम अपने प्रेम से 
मुझे मुक्त होने को 
कहते हो?

तो कह दो राजा
के महल में जल
रहे दीये की लौ
को कि वो जलना
बंद कर दे
जिससे की ठंडी
रात में तालाब में
इनाम की चाह में
पड़ा ब्राम्हण ठिठुर
कर मर जाए।

अगर ये सब कहने की
तुम्हारी चेष्ठा नहीं है तो
बस एक बात सुन लो

दो आत्माओं के मिलन
से प्रेम परिपूर्ण होता है
एक दूसरे से मुक्त होने 
से आत्माएँ भटकती
रहती हैं
और इस जन्म में
मैं तुम पर भूत का
इल्ज़ाम नहीं आने
देना चाहता।

©नीतिश तिवारी।




Saturday, May 16, 2020

English Poem- Chance, dance and romance .


English poem- chance, dance and romance.



Pic credit: pinterest.





English Poem- Chance, dance and romance .

Someone told me to write a romance,
But I haven't approached a girl to dance.

I asked her to dance on music beats,
She suggested me to read John Keats.

Love was supposed to take more time,
As she was busy in developing her own regime. 

Somehow I managed to hold my heart,
Ever since she denied my sweet dessert.

I decided to wait for another chance,
And indulged myself to read some beautiful romance. 

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©Nitish Tiwary.


Wednesday, May 13, 2020

बचपन वाला दौर और अंतर्द्वंद्व।


हिंदी कविता







दौर तो बचपन वाला ही चल रहा है
बस हम जवान हुए बैठे हैं ।
घर के सुनहरे पलों को छोड़ कर
बाहरी किराएदार हुए बैठे हैं ।
कुछ महीने ज़्यादा पड़ने लगें 
जहाँ हम वर्षों गुज़ार बैठे हैं । 
किसी से मिलने की तलाश में 
हम अपनों को दरकिनार कर बैठे हैं । 
बेचैनी , कौतूहल , अंतर्द्वंद्व जो कल भी थी 
उसे अभी तक अंदर जगाये बैठे हैं ।
पांच इंच में दुनिया को समेटने की तुच्छ कोशिश कर 
झूठे व्यपार में अपने को लगाए बैठे हैं ।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Tuesday, May 12, 2020

प्रेमिका की एक झलक पाने को।


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प्रेमिका की एक झलक 
के लिए हर प्रेमी मुख्य 
सड़क से नहीं बल्कि 
उसकी गली से
गुजरना चाहता है । 
इस बात से बिल्कुल
अनभिज्ञ कि वो गली 
आगे से बंद है जो 
सड़क से कभी नहीं मिलती।

Premika ki ek jhalak
ke liye har premi mukhay
Sadak se nahi balki
Uski gali se
guzarna chahta hai.
Iss baat se bilkul 
Anabhigy ki wo gali
Aage se band hai jo
Sadak se kabhi nahin milti.

©नीतिश तिवारी।



Sunday, May 10, 2020

प्रेम में भाव विभोर होना।

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प्रेम में भाव विभोर
होना कोई कुदरती
करिश्मा नहीं अपितु
इन्सानी शातिर मस्तिष्क
का नतीजा है।

Prem mein bhaw vibhor
Hona koi kudrati
Karishma nahi apitu
Insani shatir mastishk
Ka nateeja hai.

©नीतिश तिवारी।

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Thursday, May 7, 2020

तो क्या कलयुग में विष्णु के अवतार तेज प्रताप यादव ही हैं!


Tej pratap yadav rjd
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तो क्या कलयुग में विष्णु के अवतार तेज प्रताप यादव ही हैं!

दोस्तों, आज हम बात करेंगे बिहार को आदिकाल में ले जानेवाले महापुरुष लालू यादव के त्रिकालदर्शी सुपुत्र श्री तेज प्रताप यादव की। ऐश्वर्या राय से विवाह के उपरांत इनके व्यक्तित्व का विकास ऐसे हुआ कि इन्हें भोले भंडारी और कृष्ण मुरारी के नाम से भी जाना जाने लगा।

इनके महापौरुष का प्रभाव ऐसा है कि ये खुलेआम दिनदहाड़े प्रधानमंत्री मोदी का खाल उधेड़ने की घोषणा कर देते हैं। मोदी को तो छोड़िए, ये अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प को भी चुनौती दे चुके हैं। ट्रम्प के भारत दौरे पर इन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि ट्रम्प इतने गोरे हैं कि खेत में नहीं जा सकते। जबकि मैं साँवला हूँ और दिन भर खेत में काम कर सकता हूँ। हमारे पिताजी को तो चारा संग्रह करने का अनुभव भी है। इस नाते हम खानदानी किसान हुए। ट्रम्प को चुनौती देते हुए वो आगे लिखते हैं कि ट्रम्प साहब बूढ़े हो गए फिर भी मेहरारू को अपने साथ रखते हैं। जबकि हमने तो जवानी में ही मेहरारू का त्याग कर दिया। 

लोगों में तो ये भी चर्चा है कि तेज प्रताप यादव नई नई शादी के बाद कृष्ण कन्हैया बनकर रासलीला को तैयार थे। लेकिन इनकी धर्मपत्नी ऐशवर्या ना तो राधा बनने को राज़ी थीं और ना ही गोपियों के संग रासलीला की इजाज़त दे रही थीं । ऊपर से मदिरा सेवन को भी आतुर थीं। इसी बात पर इन दोनों का झगड़ा हो गया जो आगे चलकर वैवाहिक संबंध विच्छेद का विकराल रूप धारण कर लिया।

एक बार अपने अवतरण दिवस के कार्यक्रम में खाने के प्लेट कम हो जाने पर इन्होंने अपने क्रोध की अग्नि से प्लेट लाने वाले बालक को ही भस्म कर दिया था। खैनी की चुनौटी और गांजे का चिलम रखने के लिए तेजू भईया ने विशेष रूप से तैयार करवाया हुआ थैला थाईलैंड से मंगवाया है । इस थैले को ये सदैव अपने समीप ही रखते हैं जिससे कि आपातकाल की स्थिति में भी चिलम से एक कश लिया जा सके।



तेजू भईया का तो इतना तक कहना है कि अगर अभी वे देश के या बिहार के स्वास्थ्य मंत्री होते तो कोरोना को  भैंसिया के चारा के गमक से ही मारकर भगा देते। 
अफीम की खेती के जैसे अपराध को सींचने वाले लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र श्रीमान तेज प्रताप यादव, आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के प्रदर्शन को लेकर काफी उत्साहित और आशान्वित हैं।

©नीतिश तिवारी।
This is total satire . Don't put me in jail.
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Saturday, May 2, 2020

नज़र बदलो नज़रिया बदलो।








जमाना कह रहा है तुम बिगड़े बहुत हो,
हमने कहा हम सुधरे बहुत हैं।
जब पड़ रहे थे गम के थपेड़े,
तब तुम्हें हमारा खयाल नहीं था,
अब सब कुछ शांत है तो आये हो,
कहने हमें कि हम बिगड़े बहुत हैं।
नज़र बदलो, नज़रिया बदलो,
समय का पहिया घूम रहा,
गलत बात तुम तक पहुंचा रहा,
तुम भी अपना खबरिया बदलो।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, April 30, 2020

तुझसे मिलकर मैं खराब हो गया।


Shayari
Pic credit: instagram.







तुम अजनबी थे
तो मैं अच्छा था
जब से जाना तुझे
मैं खराब हो गया

होश में लाने को
लोग मुझ पर
पानी डालते हैं
और फिर से
मैं बेहोश हो
जाता हूँ

लगता है तुम्हारे
हुस्न के जादू से
पानी भी शराब 
हो गया
तुझसे मिलकर मैं
खराब हो गया

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, April 28, 2020

English poem- Pride and prejudice.

                     Picture credit: pinterest.





Between my heart
And your mind
Our love failed to survive.
Just like rock of the ice
I loved you daily twice
And you didn't bother 
To be nice .
Numbers were spinning 
On the dice .
Love for me was pride 
For you it was prejudice.

©Nitish Tiwary. 
Fb: poetnitish
Twitter: nitishpoet

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Friday, April 24, 2020

तुम्हारी याद आती है।

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गाँव में रहूँ
तो शहर की
याद आती है

शहर में रहूँ 
तो गाँव की
याद सताती है

इन दो यादों के बीच
मैं तुम्हें फोन कर लेता हूँ
और मेरी शाम यूँ ही
गुजर जाती है

Gaon mein rahu
Toh shahar ki
Yaad aati hai

Shahar mein rahu 
Toh gaon ki
Yaad satati hai

Inn do yadon ke beech
Main tumhen phone kar leta hu
Aur meri shaam yu hi 
Gujar jaati hai

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, April 22, 2020

इश्क़ नहीं करता आज़माने को।













Pic credit: Pinterest.
















तुम मुझको कहते हो भूल जाने को,
मेरा दिल नहीं करता तुम्हें रुलाने को।

आशिक़ों की फौज़ तो तुमने कई देखे होंगे,
मैं इश्क़ नहीं करता सिर्फ़ आजमाने को,

जवानी में मोहब्बत को कैसे नाक़ाम होने दूँ,
बचपन से ही बेचैन था दिल लगाने को।

ख़त लिखने की जरूरत तुम्हें नहीं पड़ेगी,
मैं फोन दिलवा दूँगा तुम्हें बतियाने को,

ज्यादा मत सोचों अब बस हाँ कर दो,
नहीं तो चला जाऊँगा मैं मयख़ाने को।

Tum mujhko kahte ho bhool jane ko,
Mera dil nahin karta tumhen rulane ko,

Ashiqon ki fauz toh tumne kai dekhe honge,
Main ishq nahi karta sirf aazmane ko,

Jawani mein mohabbat ko kaise naqaam hone du,
Bachpan se hi bechain tha dil lagane ko,

Khat likhne ki jarurat tumhe nahi padegi,
Main phone dilwaa dunga tumhe batiyane ko,

Jyada mat socho ab bas haan kar do,
Nahi to chala jaunga main maikhane ko.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, April 21, 2020

Civil service day 21st April and Corona warriors .

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Civil service day 21st April and Corona warriors .

आज सिविल सर्विस डे यानी की लोक सेवा दिवस है।
भारत सरकार प्रतिवर्ष इसी दिन लोकसेवा दिवस के रूप में मनाती है जिसमें भारतीय सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाता है। जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारियों को पुरस्कृत किया जाता है।

आज कोरोना महामारी के समय में सभी चिकित्सकों, नर्सों, स्वास्थ्य अधिकारियों, सफाईकर्मी और पुलिस प्रशासन को सम्मानित करने की आवश्यकता है। 

कुछ पंक्तियाँ हमारे कोरोना वारियर्स के नाम प्रेषित करता हूँ।

संकट की इस घड़ी में हम साथ रहेंगे,
कर्तव्य निभाने से हम कभी ना डरेंगे,
जनता का सहयोग भी मिलेगा भरपूर,
हम सब मिलकर कोरोना से लड़ेंगे।

एक बार जो जीत गए तो फिर सम्मान होगा,
कोरोना वारियर्स के रूप में आपका नाम होगा,
चुनौतियों का हम डंटकर मुकाबला करेंगे,
जल्द ही कोरोना मुक्त ये हिन्दुस्तान होगा।

सभी कोरोना वारियर्स को सलाम।

©नीतिश तिवारी।


Sunday, April 19, 2020

साथ मिले तो बेहतर होगा।

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साथ मिले तो बेहतर होगा,
ना भी मिले तो ग़म नहीं।
दुनिया मुझको भूल चुकी है,
हम ही रहे अब हम नहीं।

Saath mile toh behtar hoga,
Na bhi mile toh gham nahin.
Duniya mujhko bhool chuki hai,
Hum hi rahe ab hum nahi.

©नीतिश तिवारी।


Friday, April 17, 2020

कविताएँ लिखता हूँ।


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भूख लगती है,
भोजन करता हूँ,
शरीर स्वस्थ रहता है।

मन विचलित होता है,
तो कविताएँ लिखता हूँ,
आत्मा तृप्त होती है।

Bhookh lagti hai,
Bhojan karta hoon,
Shareer swasth rahta hai,

Man vichleet hota hai,
Toh kavitayen likhta hoon,
Aatma tript hoti hai.

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, April 15, 2020

मैं प्रेम लिखता हूँ।









मैं प्रेम लिखता हूँ,
प्रेम में मिला 
दर्द लिखता हूँ।

लोगों को प्रेम
और दर्द एक साथ
पसंद नहीं आते
फिर मैं रात वो
सर्द लिखता हूँ।

Main prem likhta hu
Prem mein mila
Dard likhta hu.

Logon ko prem
Aur dard ek saath
Pasand nahin aate
Phir main raat wo
Sard likhta hu.

©नीतिश तिवारी। 

Monday, April 13, 2020

शहद को शराब कर दिया।
























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मोहब्बत ऐसी की शहद को शराब कर दिया,
बचपन में तो अच्छे थे, जवानी ने खराब कर दिया,
तुम बार बार मुझसे इश्क़ करने को कहते हो,
एक ही लड़की ने बुढ़ापे तक का हिसाब कर दिया।

Mohabbat aisi ki shahad ko sharaab kar diya,
Bachpan mein to achhe the, jawani ne kharaab kar diya,
Tum baar baar mujhse ishq karne ko kahte ho,
Ek hi ladki ne budhape tak ka hisaab kar diya.

Read Also : My letter for Mr. Shah Rukh Khan.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, April 12, 2020

हिन्दी कविता- कर्म।

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#कर्म 

भगवान इंसानों में ही बसते हैं 
राम कृष्ण सब कर्म से बनते हैं 
जो कर्मों को अपने अंदर जगा  लेते हैं 
वही भगवान बनते हैं
जिनकी  कर्मो की कथाएँ प्रचलित हैं उनकी ही तो  मंदिरों में प्रतिमायें स्थापित हैं
उपासना उन्हीं की होती है जिनके कर्म समर्पित होते हैं 
धर्म निर्माण भी तो कर्म से ही होते हैं 
सुख का आसन या दुःख का पाषाण भी तो कर्म से ही टूटते हैं 
जो कर्म युद्ध में जीतते हैं वही तो महारथी उभरते हैं 
कर्म ही पूजे जाते हैं 
देह तो नश्वर होते हैं 
कर्म ही तो हमें अमर बनाते हैं
भगवान इंसानो में ही बस्ते हैं 
इंसान कर्म से ही भगवान बनते हैं  

©शांडिल्य मनीष तिवारी।


Saturday, April 11, 2020

मोहब्बत का कोई इनाम तक ना मिला।



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करवटें लेता रहा तमाम रात, नींद का पैगाम तक ना मिला,
शराब पीने की हमने सोंची एक बार, मगर जाम तक ना मिला।
लैला-मजनूँ , हीर राँझा की तो मिसालें हुआ करती हैं,
और एक हमारी मोहब्बत का कोई इनाम तक ना मिला।

Karwaten leta raha tamaam raat, neend ka paigaam tak naa mila,
Sharab peene ki humne sonchi ek baar, magar jaam tak na mila,
Laila mahino heer ranjha ki to misalen hua karti hain,
Aur ek humari mohbbat ka koi inaam tak na mila.

©नीतिश तिवारी।