Saturday, November 7, 2020

नया नया आशिक़ हुआ है।

 

Pic credit: Google.




उसकी यादों का ज़ख्म हर रोज चुभता है,
इश्क़ का मरहम अब कहीं नहीं मिलता है,
मेरा दोस्त आजकल नया नया आशिक़ हुआ है,
वो भी अब मेरे साथ ही रहता है। 

Uski yadon ka zakhm har roj chubhta hai,
Ishq ka marham ab kahi nahi milta hai,
Mera dost aajkal naya naya ashiq hua hai,
Wo bhi ab mere saath hi rahta hai.

©नीतिश तिवारी।


4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (08-11-2020) को    "अहोई अष्टमी की शुभकामनाएँ!"  (चर्चा अंक- 3879)        पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --

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    Replies
    1. रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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