Friday, 19 July 2019

Kahin der na ho jaye.













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तू जो मुस्कुराए तो मौसम में बहार आ जाए,
बंजर जमीन में भी बरखा की फुहार आ जाए,
मोहब्बत गर है तो फिर इज़हार कर दे,
कहीं देर ना हो जाए और  इतवार आ जाए।

Tu jo muskuraye toh mausam mein bahar aa jaye,
Banjar zameen mein bhi barkha ki gujaar aa jaye,
Mohabbat gar hai toh for izhaar kar de,
Kahin der na ho jaye aur it waar aa jaye.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 16 July 2019

बेवफ़ाई ने मशहूर कर दिया।








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मेरे इश्क़ ने तुम्हें जन्नत का हूर कर दिया,
जमाने भर के सामने हमें मजबूर कर दिया,
अफ़साना अंजाम तक ना पहुँचा तो क्या,
तुम्हारी बेवफाई ने मुझे मशहूर कर दिया।

Mere ishq ne tumhen jannat ka hoor kat diya,
Jamane bhar ke samne humen majboor kar diya,
Afsana anzaam tak naa pahuncha to kya,
Tumhari bewfai ne mujhe mashhoor kar diya.

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 13 July 2019

कविता- बरसात और मुलाकात ।



















वो आषाढ़ का पहला दिन था 
मगर मैं अज्ञात उनसे मिलने चला 
टिक-टिकी 4:45 की ओर इशारा कर रही थी 
घनघोर घटा उमड़ रहे थे 
मानो उनका भी मिलन महीनों बाद आज ही होने वाला था 
वैसे मैं भी महीनों बाद ही मिलने वाला था
इंतज़ार के लम्हे तन्हाईयों के आगोश में लिपटे मुझसे परिचय कर रहे थे 
टिक - टिकी के गति से तेज धक-धक की बेचैन करने वाली आवाज सुनाई देने लगी जैसे ही दूर से उनकी आहटों का एहसास हुआ 
रोम रोम पुलकित हो उठा
तभी नभ से एक बूंद मेरे बालों को चूमता हुआ ललाट तक आ पहुँचा 
मानो जैसे वहाँ भी मिलन बस होने ही वाला था 
वो मेरे और नज़दीक आ रही थी 
मगर मैं एक ही जगह अपने पाँव को अंगद की भाती जमाये खड़ा था 
मेरे हाथों में जो गुलाब की पंखुड़ियों का समूह था वो सतह को चूमने वाला ही था तभी एक और बूंद मेरे हाथों को अपना एहसास करने में सफल रहा और पंखुड़ियों के समूह को सतह पर बिखरने से रोक दिया 
अब वो मेरे करीब थी और मैं खुशी घबराहट और हिचकिचाहट से अपना परिचय करा रहा था 
तभी उन्होंने मेरे हाथों से पंखुड़ियों का गुच्छा लिया और अचानक से बादल भी टूट पड़े 
वो आषाढ़ का पहला दिन था ।।

ये भी पढ़िए: इश्क़ का ठिकाना।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Tuesday, 9 July 2019

Zindgi ishq aur tum.


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करते रहे हम उम्र भर ज़िंदगी से शिकवा,
फिर मौत से सामना हुआ और ज़िंदगी रूठ गई।

Karte rahe hum umr bhar zindgi se shikwa,
Fir maut se saamna hua aur zindgi rooth gayi.

सफर में हमसफर मिले और ज़िंदगी सँवर जाए,
ऐसा हसीन सपना मैंने देखा था एक रोज।

Safar mein humsafar mile aur zindgi sanwar jaye,
Aisa haseen sapna maine dekha tha ek roj.

©नीतिश तिवारी।





Sunday, 7 July 2019

लघुकथा- ट्रेन का सफर।

















लघुकथा- ट्रेन का सफर।

ट्रेन खुले हुए दो घंटे बीत चुके थे। अभी रात भर का सफर बाकी था। वो सामने वाली सीट पर पिछले दो घंटे से बैठकर किताब पढ़ रही थी। कभी कभी हमारी नजरें मिल जाती थी। जब आप एक लेखक हों और आपके सामने कोई किताब पढ़ रही हो तो बात करने की उत्सुकता तो हो ही जाती है। 

हिम्मत करके मैंने पूछ ही लिया, " बड़े ध्यान से आप घंटों से ये किताब पढ़ रही हैं। किस बारे में है ये किताब?"
पहले तो उसने हैरानी से मुझे देखा। फिर जवाब दिया, "कुछ खास नहीं लेकिन आप क्यों पूछ रहे हैं?"
मैंने कहा," मैं भी एक लेखक हूँ और अपनी पहली नॉवेल लिख रहा हूँ।"
फिर उसने मुझे बधाई दी। 

अगले कुछ घंटों में हमलोग काफी घुल मिल गए थे। डिनर भी हमने साथ में किया। चूंकि उसे पहले उतरना था इसलिए मुझे सोने से पहले आगे की बात करनी थी। मैंने कहा, "आपने अपना नाम नहीं बताया अभी तक।"
उसने कहा, "मैं सिमरन और आप?"
"जी, मैं राज।"
वो थोड़ी देर के लिए खामोश हो गयी। शायद DDLJ का सीन याद कर रही होगी। 
अगले ही पल उसकी खामोशी को तोड़ते हुए मैंने कहा,"आपने हमारी दोस्ती की किताब में पहला चैप्टर तो लिख दिया। लेकिन हम इस किताब को पूरा करना चाहते हैं।"  वो मेरा इशारा समझ गयी थी। उसने अपनी पर्स से एक पन्ना निकाला उस पर अपना नंबर लिखा और मुझे देते हुए कहा, " ये लीजिये, ये आपको आपकी किताब पूरी करने में मदद करेगा।" इतना कहकर उसने गुड नाईट बोला और सोने के लिए चली गयी।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 3 July 2019

मोहब्बत का हिसाब मिलेगा।

























Pic credit : Pinterest.



खोखले वादे करने का तुम्हें खिताब मिलेगा,
मोहब्बत में सितम जो किए उसका हिसाब मिलेगा,
मेरी तड़प देखकर अब तुम्हें हैरानी हो रही है,
परेशान मत हो, एक दिन इसका भी जवाब मिलेगा।

Khokhle wade karne ka tumhen khitab milega,
Mohabbat mein sitam jo kiye uska hisab milega,
Meri tadap dekhkar ab tumhen hairani ho rahi hai,
Pareshan mat ho, ek din iska bhi jawab milega.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 30 June 2019

Shayari- Mohabbat ka Dastoor.

























Pic courtesy : Google.





बिछड़ना मिलना मिलकर बिछड़ना,
तुम्हें खोकर भी तेरा हो जाना,
मोहब्बत का दस्तूर ही कुछ ऐसा है,
गलतफहमी को भी सच मान लेना।

Bichhadna milna milkar bichhadna,
Tumhen khokar bhi tera ho jana,
Mohabbat ka dastoor hi kuch aisa hai,
Galatfahmi ko bhi sach maan lena.

©नीतिश तिवारी।


Saturday, 29 June 2019

तुम्हें पता है?

























Pic credit : pinterest.









मैं अपनी हर बात यूं ही तुमसे नहीं कहता ..
तुम्हें पता है .?? जब मैं तुम्हारे पास होता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

तुम्हें खोने का ख्याल आते ही ..
आंसू बहाता हूं पैर पटकता हूं ..
जुल्फें बिखर जाती हैं चेहरा बिगड़ आता है..
ये बेचैनी मैं यूं ही नहीं सेकता
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे याद करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

दिल की गुल्लक में तेरी हर यादें सहेजे रखा हूं
पर तेरी बेपरवाही देख मैं हक्का-बक्का हूं
जब भी आईने के आगे जाता हूं
तो अपने सामने तुझे ही पाता हूं।।
हवाओं के साथ मैं अब यूं ही नहीं बहता 
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे मेहसूस करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

जब तू सामने से गुजरती है..
मेरी जान पर आ पड़ती है
मिसाल है तू खुदा की बेहतरीन कारीगरी की
तुझे देखना मानो दीदार हो किसी परी की..
इश्क, मोहब्बत, चाहत का पहाड़ यूं ही नहीं मुझपे ढेहता।।
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे देखता हूं..
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Thursday, 27 June 2019

रूह से मोहब्बत।

























Pic credit : Google.






रूह से रूह की मोहब्बत करोगे तो अच्छा होगा,
तुम हुस्न के करीब मत जाओ, बर्बाद हो जाओगे।

Rooh se rooh ki mohabbt karoge to achha hoga,
Tum husn ke kareeb mat jao, barbaad ho jaoge.

ना गवाह, ना वकील फिर भी सजा उम्रकैद की,
इश्क़ में मुकदमे का अंजाम ऐसा ही होता है।

Na gawah, na wakil fir bhi saja umrquid ki,
Ishq mein mukadame ka anjaam aisa hi hota hai.

ये भी पढ़िए : इश्क़ का ठिकाना।

©नीतिश तिवारी।


Sunday, 23 June 2019

Tum kya jano dard kya hota hai!










Pic credit : Unspoken Voice.







तुम क्या जानो दर्द क्या होता है,
छोटा बच्चा भूख से क्यों रोता है,
इंसान पापी पेट के लिए क्या करता है।

तुम्हें तो बस बंगला गाड़ी पैसा चाहिए,
मेरे जैसा नहीं उसके जैसा चाहिए,
गर्मी में सर्दी और सर्दी में वर्षा चाहिए।

कितनी अजीब ख्वाहिशें हैं तुम्हारी,
हालात को समझ नहीं पाते हो तुम,
सात सुरों की तो धुन ही होती है,
फिर आठवाँ सुर क्यों लगाते हो तुम।

मेरी काबिलियत पर भरोसा रखो,
सब कुछ ठीक कर दूँगा मैं,
फिर मुझे कोई शिकायत ना होगी,
सब कुछ ठीक कर दूँगा मैं।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 21 June 2019

इश्क़ का ठिकाना।













Pic credit: Pinterest.







फूलों की ख्वाहिश तुम्हें है, काँटों से बैर रखते हो,
अपनों की तुम्हें कद्र नहीं, साथ में गैर रखते हो।

Foolon ki khwahish tumhen hai, kaanton se bair rakhte ho,
Apnon ki tumhen kadr nahin, saath mein gair rakhte ho.

आजमा कर देख लेना या देखकर आजमाना,
इश्क़ कर रहे हो तुम जिसका कोई नहीं ठिकाना।

Aajma kar dekh lena ya dekhkar aajmana,
Ishq kar rahe ho tum jiska koi nahin thikana.

©नीतिश तिवारी।

Friday, 14 June 2019

Garib Rath में यात्रा का अनुभव।



















हाँ जी, दोस्तों हाल ही में मैंने रेलवे यात्रा का आंनद उठाया। एक बार फिर से। उसी अनुभव के बारे में आपसे बात करूँगा। लालू यादव के वरदान स्वरूप प्राप्त हुए गरीब रथ में यात्रा का एक अलग ही आंनद है। कहने को तो सारे कोच 3AC हैं लेकिन कोच के अंदर का डिजाइन ऐसा है कि बहुत दिक्कत होती है।  खैर किराया कम है तो कुछ तो दिक्कत उठाना ही पड़ेगा।

दिल्ली से सफर की शुरुआत हो चुकी थी। ट्रेन समय से खुल चुकी थी। भारत में ट्रेन अगर समय से खुल जाए तो ये समझिए कि आपके टिकट का आधा पैसा वसूल हो गया। मैं हमेशा से सबसे ऊपर की बर्थ लेता हूँ ताकि दिन में भी सोने का मन हो तो सोया जा सके। खैर थोड़ी देर तक नीचे ही बैठा रहा। इसी बीच चाय, पानी और कोल्ड ड्रिंक की बिक्री शुरू हो चुकी थी। इतना तक तो ठीक था मतलब जनरल रूटीन। मजा तो अब आने वाला था। 

सामने वाले बर्थ पर एक भाई साहब बैठे थे। उनके पास 2 iphone था, एक छोटा और एक बड़ा। इसके अलावा एक सिंपल वाला फोन भी था। बार-बार एक फोन जेब से निकालते, फिर उसे रखते फिर दूसरा निकालते, फिर उससे बात करते। थोड़ी देर बाद फिर iphone निकालते, गाना सुनते। फिर रखते, फिर निकालते। यही सिलसिला करीब आधे घंटे तक चलता रहा। मुझसे रहा नहीं गया। मैंने पूछ ही दिया, "भाई साहब, आप कौन सा ऐसा बिजनेस करते हैं जो इतने महंगे फोन हैं आपके पास और इतना बिजी हैं आप?"
भाई साहब कुछ बोल नहीं पाए। हाँ, मतलब कुछ लोग ऐसा दिखावा करते हैं जैसे कि अम्बानी की तीसरी औलाद वही हैं। 

अभी ये बात खत्म ही हुई थी कि मेरे पास एक फोन आया बैंक से। बैंक वाला "सर, आपका एक लोन चल रहा है उस पर 2.5 लाख का top up आया है।" मैंने कहा, "अच्छा।" " जी सर, आपका top up आया है। तो कब प्लान कर रहे हैं आप?" मुझे बड़ा गुस्सा आया, मैंने गुस्से भरी आवाज में बोला "भाई साहब, बच्चा प्लान किया जाता है, लोन नहीं, जब जरूरत होगी तब बताऊँगा।" मैंने भी सुना दिया उसे। 

इसी बीच काले कोट वाले भाई साहब आ चुके थे। मैंने अपना टिकट चेक कराया। पड़ोस वाली सीट पर एक महिला अपने छोटे बच्चे को लेकर बैठी थीं। उनका टिकट किसी और के नाम का था। मतलब पुरुष के नाम पर महिला यात्रा कर रही थी। बात करने पर पता चला कि उन्होंने स्टेशन पर ही किसी से एक्स्ट्रा पैसा देकर टिकट खरीदा था। देखने में ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं लग रही थी, सीधा सा मतलब था कि वो ठगी का शिकार हुई थीं। इसमें दोनों की गलती थी, एक हमारे सिस्टम की और दूसरे यात्री की। वहीं पर अगले सीट एक लड़की बैठी थी उसके साथ भी यही मसला था। मैडम ने प्रीमियम तत्काल टिकट लिया था वो भी स्टेशन से। और मजे की बात तो देखिए कि उस टिकट पर बुकिंग डेट 2 महीने पहले की थी। सीधा मतलब था कि वो भी इस ठगी का शिकार हो गयी थी तब जबकि उनके पास iphone था। इस बात से यह सिद्ध होता है कि ब्रांड इस्तेमाल करने से बुद्धि नहीं आ जाती। एक तो चोरी ऊपर से सीनाजोरी। मैडम ने फोन मिला दिया किसी को और TC को पकड़ा दिया। मतलब, " लीजिये बात कर लीजिए" वाली प्रथा हिंदुस्तान में कभी खत्म नहीं होगी।

इन सब के बीच रात्रि के 9 बज चुके थे। ट्रेन कानपुर पहुंच चुकी थी। मैंने खाना खाया और सोने के लिए जा ही रहा था कि एक मम्मी ने अपने बच्चे को आवाज लगाते हुए बोला," बेटा रोहन, मोबाइल दे दीजिए। आप बहुत देर से गेम खेल रहे हैं।" कुछ औरतें पब्लिक प्लेस में अपने बच्चों की बहुत इज्जत करती हैं और उन्हें आप बुलाती हैं। भले ही वही बच्चे घर पर दिन भर में चार बार कूट दिए जाते हों। अच्छा बच्चों के साथ एक समस्या और है। एक तो ये हाफ टिकट या बिना टिकट ट्रैवेल करते हैं और ऊपर से शोर बहुत मचाते हैं। हाँ, मतलब सोने में दिक्कत होती है ना। 

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 11 June 2019

मोहब्बत को सलामत रख पाता हूँ।









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तेरी जुल्फों के छाँव तले तेरे होठों की प्यास बुझाता हूँ।
मैं अपनी आरज़ू को इबादत की तरह अपनाता हूँ।
मेरी जिंदगी कभी खत्म ना हो तेरे बगैर।
यही दुआ करके अपनी मोहब्बत को सलामत रख पाता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 7 June 2019

Justice for Twinkle.

















आज मन बहुत दुखी है। बस इतना ही लिख पाया।

कैसे कह दूँ यहाँ अल्लाह मौजूद है या भगवान,
हैवानियत का शिकार हो गयी एक बेटी नादान।

राजनीति की रोटियाँ कब तक सेकते रहोगे तुम,
इंसाफ दो बेटी को नहीं तो एक दिन आएगा तूफान।

कैसे हम इस सिस्टम का कर पाएंगे सम्मान,
कुछ बाकी नहीं रहेगा यहाँ ना रहेगा इंसान।


अब किलकारी नहीं गूँजती,
खिलौने एक कोने में पड़े हैं।

कोई बच्चे नहीं आते अब, 
गुड़िया मेरी नहीं रही अब।

क्यों ऐसा जुल्म हो गया,
घर सूना हो गया है।


©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 5 June 2019

Salman Khan slaps security man for being rough with fan kid at Bharat Screening.


















सलमान खान की फ़िल्म भारत रिलीज़ हो चुकी है। लेकिन बीती रात फ़िल्म के स्पेशल स्क्रीनिंग पर जो हुआ वो हैरान करने वाला है। सलमान ने अपने बॉलीवुड के दोस्तों के लिए भारत मूवी की स्पेशल स्क्रीनिंग मुम्बई में रखी थी। खबर है कि सलमान ने वहीं पर एक सुरक्षा कर्मी को थप्पड़ मार दिया।

सूत्रों से पता चला है कि सलमान को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि वो सुरक्षाकर्मी गलत तरीके से एक बच्चे से बात कर रहा था। और वो बच्चा सलमान का फैन था। बात चाहे कुछ भी रही हो लेकिन सलमान को अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए। करोड़ों युवा उनको फॉलो करते हैं। इस तरह की हरकत उन्हें शोभा नहीं देती। बाकी आप लोग सलमान के व्यवहार से बखूबी वाकिफ़ हैं।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 4 June 2019

Mohabbat mein Mahabharat.










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ये गीता का ज्ञान 
नहीं ये मोहब्बत
की दास्तान है।

कुरुक्षेत्र बना 
है दिल मेरा
जिसमें तेरे छल
और प्रपंच है
तुम जीतना 
चाहती हो मुझसे 
पर अफसोस
ये मुमकिन ना होगा।

भले ही जज्बात 
रूपी हजारों सैनिक 
हैं तुम्हारे पास 
लेकिन मेरे पास
कृष्ण सरीखा 
धैर्य है 
हौसला है।

ना मैं कर्ण हूँ 
और ना ही
तुम दुर्योधन
जो तुम्हारे मोहब्बत 
के कर्ज तले
मैं दबा रहूँगा।

ना मैं अभिमन्यु
हूँ जो तेरे
भावनाओं के 
चक्रव्यूह में आकर
मार दिया जाऊँगा।

ना मैं धृतराष्ट्र हूँ
ना तुम संजय
जो तुम सुनाओगी
और मैं चुपचाप
सुन लूँगा।

प्रेम के इस
धर्मयुद्ध में
जीत किसकी
होगी ये तो
वक़्त बताएगा।

बस इतना कहना
है तुमसे कि
मोहब्बत में महाभारत
का वक़्त तुमने
गलत चुना है।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 3 June 2019

Mohabbat ki shayari.

Pic credit : Google.







दर्द का डर था जब  मैं तेरे साथ था,
अब मेरा कुछ नहीं मोहब्बत बेहिसाब था।

Dard ka dar tha jab mai tere saath tha,
Ab mera kuch nahin mohabbat behisab tha.

हमें मालूम है कि हमारा कुसूर क्या है,
कि हमने मोहब्बत करने की खता की है।

Humen maloom hai ki humara kusur kya hai,
Ki humne mohabbat karne ki khata ki hai.

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 30 May 2019

Shayari- Mujhe ishq hai tumse.













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मुझे इश्क़ है तुमसे, मैं इसका इज़हार करूँगा,
मोहब्बत के रश्म के लिए खुद को तैयार करूँगा,
खुद को कभी अकेला मत समझना तुम,
इस जनम में क्या, हर जनम में तुम्हें प्यार करूँगा।

Mujhe ishq hai tumse, main iska izhaar karunga,
Mohabbat ke rasm ke liye khud ko taiyaar karunga,
Khud ko kabhi akela mat samjhna tum,
Is janam mein kya, har janam mein tumhe pyar karunga.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 26 May 2019

कविता- मोदी नए भारत की गाथा लिखेंगे।





















अब भर दिया हुंकार है,
ये जीत नहीं ललकार है,
कोई नहीं है टक्कर में,
विपक्ष पर करारा प्रहार है।

लोकतंत्र की जीत हुई है,
नए भारत का निर्माण होगा,
राष्ट्रवाद अब विजय हुआ है,
जनता के भरोसे का सम्मान होगा।

जन कल्याण की योजनाओं से,
पूरा बहुमत फिर से आया है,
बढ़ चढ़कर मतदान किया है,
तभी तो मोदी फिर से आया है।

राष्ट्र को सर्वप्रथम रखकर,
विकास की नई परिभाषा लिखेंगे,
जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप,
मोदी नए भारत की गाथा लिखेंगे।

©नीतिश तिवारी।


Thursday, 23 May 2019

Narendra Modi registered historic victory in Lok Sabha election 2019.

























आखिरकार वो पल आ ही गया जिसका सबको इंतज़ार था। चुनावी नतीजे घोषित हो चुके हैं। मोदी जी पुनः एक बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उनको जीत की बधाई। सबका साथ और सबका विकास के नारे पर चलते हुए मोदी जी ने 2014 के 'मोदी लहर' को 'मोदी सुनामी' में तब्दील कर दिया है। 

इस बात से आज किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए कि मोदी जी एक ब्रांड बन चुके हैं और हर भारतीय को गर्व होना चाहिए कि हम ऐसे युग में हैं जहाँ पर नरेंद्र मोदी जैसे यशश्वी नेता हमारे प्रधानमंत्री हैं। भारत में 21वीं सदी के जननेता नरेंद्र मोदी जी बन चुके हैं। जिस तरह से सभी विपक्षी दल झूठी एकता का प्रदर्शन करने पर अमादा थे, नरेंद्र मोदी की इस जीत से देश ने एक ही झटके मे 20 प्रधानमंत्री खो दिए।
UP में महागठबंधन की हालत का सीधा मतलब है कि जातिगत राजनीति वहाँ काम नहीं आयी।  मुझे लगता है कि जनता ने जाति से ऊपर उठकर भारत के नागरिक के रूप में वोट दिया है। अमित शाह का बूथ मैनेजमेंट और नए युवा नेताओं को मौका देना भी एक बड़ा कारण रहा।

भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं और देश के नागरिकों को बधाई। उम्मीद है कि नई सरकार जनभावनाओं का खयाल रखते हुए जनता की उम्मीदों पर खरी उतरेगी और दुनिया में देश का नाम रौशन करेगी।

भारत माता की जय।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 20 May 2019

मैं मौजूद रहूँगा।













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मैं तेरे शहर में,
दिन के आठों पहर में,
ग़ज़ल की बहर में,
मौजूद रहूँगा।

तुम प्यार मुझसे जरूर करना,
सीप से मोती जरूर चुनना,
ख़्वाबों में सिर्फ मुझे देखना,
मैं उन ख़्वाबों में,
मौजूद रहूँगा।

ये भी पढ़िए: काश तुम।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 16 May 2019

फर्क नहीं पड़ता।













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मुझे फर्क नहीं पड़ता
कि तुम मुझे मुस्कुरा
कर देखती हो
या देखकर मुस्कुराती हो
मुझे तो बस तुम्हारे
होठों पर हँसी 
देखनी है।

मुझे फर्क नहीं पड़ता
कि तुम मुझे प्यार
करती हो या नहीं
मुझे तो बस तुम्हारे
साथ रहने से 
सुकून मिलता है।

मुझे फर्क नहीं पड़ता
कि लोग मुझे 
एक तरफा प्यार 
में पागल आशिक़
कहते हैं
बस एक भरोसा
है कि एक दिन
ये प्यार दोनों
तरफ से होगा।

इसे भी पढ़िए: अधूरा इश्क़, पूरी मोहब्बत और तुम।

©नीतिश तिवारी।


Monday, 13 May 2019

बचपन की बातें।









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रेत पर महल बनाए,
कागज़ के नाव चलाए,
बचपन की बाते थीं जनाब,
काश वो दिन फिर लौट आए।

Ret par mahal banaye,
Kagaz ke naam chalaye,
Bachpan ki wo baaten thi janab,
Kaash wo din fir laut aaye.

ये भी पढ़िए : शाहरुख खान के लिए मेरा पत्र।

©नीतिश तिवारी।






Thursday, 9 May 2019

फैसला गलत हो गया।














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मोहब्बत पाने को हमने खूब तरतीब किया,
बस यही एक फैसला हमारा गलत हो गया।

Mohabbat pane ko humne khoob tarteeb kiya,
Bas yahi ek faisla humara galat ho gaya.

गुनाहों की सज़ा दे पर थोड़ा कद्र-ए-मोहब्बत भी कर,
धड़कनों को जिस्म से अलग करके  ज़िंदा कैसे रहेगा।

Gunahon ki saza de par thoda kadr-e-mohabbat bhi kar,
Dhadkano ko jism se alag karke zinda kaise rahega.

तरतीब- Arrangement.

©नीतिश तिवारी।

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Tuesday, 7 May 2019

अधूरा इश्क़, पूरी मोहब्बत और तुम।













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मैं तन्हा
नहीं हूँ
तुम्हारा 
अधूरा
इश्क़ मेरे 
साथ है।

तुम्हारी कही
हर बात है।
बिछड़ने का
गम हो या
मिलने की 
आस हो।

अधूरा इश्क़
को पूरी
मोहब्बत का
इंतज़ार है।

©नीतिश तिवारी।

Monday, 6 May 2019

लघुकथा--बेटी का बाप।










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लघुकथा--बेटी का बाप।

गुप्ता जी ने जैसी ही पंडाल में अपने बेटे को कई लोगों के साथ बहस करते देखा तो दौड़कर पंडाल की तरफ भागे। 
"क्या हुआ बेटा सोनू, शोर क्यों मचा रहा है?" गुप्ता जी ने बड़े हैरानी से अपने बेटे से पूछा।
"देखिये ना पिताजी, मुझे कोल्ड ड्रिंक पीना है और ये लड़की वाले कह रहे हैं कि कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गया।"
सोनू ने गुस्से भरे स्वर में जवाब दिया।
गुप्ता जी अपने बेटे को समझा ही रहे थे कि इतने में बेटी का बाप आ पहुँचा और हाथ जोड़कर बोला।
"माफ करना बेटा, कोल्ड ड्रिंक खत्म हो गयी है, लेने के लिए भेजा है। अभी थोड़ी देर में आ जायेगी।"
गुप्ता जी से रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत उनका हाथ पकड़कर बोला। "रहने दीजिए समधी जी। शादी में कम ज्यादा होता रहता है। आपको कोल्ड ड्रिंक मंगाने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने भी पिछले वर्ष अपनी बिटिया की शादी की थी। मैं समझ सकता हूँ। मैं भी एक बेटी का बाप हूँ।"
अग्रवाल जी अपने आँसू नहीं रोक पा रहे थे। सोनू शर्मिदा होकर वहाँ से चला गया।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 1 May 2019

NDTV के क्रांतिकारी पत्रकार Ravish Kumar ने अपने एक Fan को थप्पड़ मारा!














हाँ जी, बिल्कुल सही पढ़ा आपने। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में क्रांतिकारी पत्रकारिता करने वाले एक ही पत्रकार हैं और उनका नाम है रविश कुमार।  वही रविश कुमार जो कभी स्क्रीन काली कर लेते हैं तो कभी सिर्फ ऐसे लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाते हैं जो सरकार के खिलाफ जमकर जहर उगलते हैं। खैर, ये उनका काम है और वो करते रहेंगे।

लेकिन एक बात मानना पड़ेगा कि भाई साहब रिपोर्टिंग बड़ी धाँसू करते हैं। मतलब मैं तो इनका फैन ही हो गया हूँ। एक किताब भी इनकी पढ़ी थी- इश्क़ में शहर होना। काबिल-ऐ-तारीफ लिखा है इन्होंने। समय मिले तो जरूर पढ़िए। 

अब जबकि हम रविश कुमार के फैन हो ही चुके थे तो पिछले दिनों चले गए इनसे मिलने। NDTV के ऑफिस पहुंचे तो पता चला कि साहब बेगूसराय गए हैं कन्हैया के प्रचार की कवरेज और इंटरव्यू के लिए। फिर क्या था, हमने भी बैग पैक किया और अगले ही दिन बेगूसराय के लिए निकल पड़े। सोंचा, इसी बहाने कन्हैया के चुनावी जमीन के बारे में भी पता चल जाएगा।

कई घंटों के लंबे सफर के बेगूसराय पहुँचा। सीधे रविश कुमार के होटल पहुँचा। मिलने के लिए हमने दिल्ली से ही appointment ले लिया था इसलिए कोई दिक्कत नहीं हुई। होटल के कमरे का दरवाजा रविश कुमार के कैमरामैन ने खोला। 

"रविश जी, नमस्कार । मैं नीतिश, दिल्ली से आया हूँ आपसे मिलने।"
"आइये नीतिश जी, बैठिए।"
रविश कुमार ने हल्के मुस्कान के साथ मेरा स्वागत किया। शायद उन्होंने मेरा ट्विटर bio पढ़ लिया था कि मैं मोदी भक्त हूँ।
खैर, चाय नाश्ते के बाद रविश जी से असली बातचीत शुरू हुई।

मैंने कहा, "सर मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ और इसलिए इस चुनावी सरगर्मी के बीच आपसे मिलने यहाँ तक चला आया हूँ।"
"जी, धन्यवाद।" रविश जी ने आभार व्यक्त किया।
"रविश जी, मैं आपसे कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ। कई दिनों से आपके बारे में जानने की जिज्ञासा है।"
"तो आप एक पत्रकार का इंटरव्यू लेने आये हैं?"
रविश कुमार ने हैरानी भरे हाव भाव के साथ पूछा।
"पत्रकार नहीं सर, आप तो क्रांतिकारी पत्रकार हैं और ये इंटरव्यू नहीं है बल्कि ये तो वो साक्षात परम ज्ञान है जो आज आपसे मुझे मिलने वाला है।"
"ठीक है, पूछिए।"
मैंने कहा,"सबसे पहले तो मैं ये जानना चाहता हूँ कि जो कन्हैया कुमार 'पूंजीवाद से आजादी' के नारे लगाता था । उसी का आज के अखबार के पहले पन्ने पर चुनावी ad है। इसके बारे में क्या कहेंगे?"
"देखिए, ऐसा है कि चुनाव में कैंडिडेट खड़ा हुआ है तो प्रचार तो करेगा ना। जहाँ तक पैसे की बात है तो जनता ने सहयोग किया है। एक गरीब छात्र नेता है। मोदी जी की तरह अंबानी और अडानी से पैसे नहीं मिला है ना।"
"ठीक है, चलिए मान लिया आपकी बात। अच्छा ये बताइये कि अभी जो मोदी जी और अक्षय कुमार का अपोलिटिकल इंटरव्यू था, उस पर भी आपको दिक्कत है। आपने ब्लैक स्क्रीन करके अपोलिटिकल प्राइम टाइम चला दिया?"
"अब क्या करें, किसी को तो जवाब देना पड़ेगा। आखिर इस तरह के इंटरव्यू का मकसद क्या था? किसने इसे फंड किया?"
"मतलब आप मानते हैं कि मोदी जी की कोई भी बात हो, चाहे उनका शूट हो, चौकीदार वाली बात हो या विदेशी दौरा। सबका विरोध करना आपका जन्मसिद्ध अधिकार है?"
"हाँ कुछ ऐसा ही समझ लीजिए। भाई trp भी तो चाहिए।"
"रविश जी, आप अपने फेसबुक पोस्ट पर कमेंट्स पढ़ते हैं, कितना विरोध होता है आपकी बातों का?"
"हाँ, पढ़ता हूँ और मैं ये दावे के साथ कह सकता हूँ कि सब भाजपा के IT सेल वाले लोग ही अनाप शनाप लिखते हैं।"
"रविश जी, मैंने आपका कई दिनों के प्राइम टाइम का विश्लेषण किया है। बहुत बढ़िया कवरेज किया था आपने। चाहे वो SSC का कवरेज हो, युवाओं में बेरोजगारी की बात हो, पर्यावरण की बात हो या फिर रेलवे के परीक्षा सेंटर दूर दिए जाने की। लेकिन हर कवरेज के आखिर में आप मोदीजी पर दोष देकर सब गुड गोबर कर देते हैं। आपका क्या कहना है?"
"मेरा बस यही कहना है कि सरकार से ही तो सवाल पूछा जाएगा।"
"लेकिन सरकार तो पहले भी थी। आपकी क्रांतिकारी पत्रकारिता पहले नज़र नहीं आती थी।"
" भाई साहब, पहले की सरकारों के खिलाफ बोलने पर trp नहीं मिलता था ना।" 
"मतलब आप सबकुछ trp के लिए ही करते हैं?"
"जी हाँ, उसी बात का तो पैसा मिलता है।"
"ठीक है रविश जी लेकिन एक बात समझ नहीं आयी। बजट के दौरान चर्चा करते वक़्त आपने कहा कि सरकार ने फलाने योजना में 5000 करोड़ आवंटित किए थे, जिसमे से सरकार केवल 4500 करोड़ ही खर्च कर पायी। ये कैसा तर्क है?"
"हाँ मतलब सही तो है। सरकार को पूरा पैसा खर्च करना चाहिए था।"
"चलिए रविश जी, अब जाने का वक़्त हुआ, लेकिन जाते जाते आखिरी सवाल। कौन जात हो?"

ये सवाल पूछना था कि रविश कुमार ने एक जोरदार तमाचा मेरे गाल पर जड़ दिया। तमाचे की झनझनाहट से मेरी नींद खुल चुकी थी। रात का ये भयानक सपना टूट चुका था। मैं सोचने लगा कि 3 महीने पहले रविश कुमार ने सही कहा था कि चुनाव तक न्यूज़ चैनल देखना बंद कर दीजिए।

©नीतिश तिवारी।

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Wednesday, 24 April 2019

Tumse pyar huaa hai.













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इश्क़ की हजार बातें, मोहब्बत के लाखों फ़साने,
और तुम पर ये दिल करोड़ों बार हार गया है।
मुझको नींद नहीं आती, ना ख्वाब कोई दिखता,
ऐसा लगता है कि मुझे तुमसे प्यार हुआ है।

Ishq ki hazaar baaten, mohabbat ke lakhon fasane,
Aur tum par ye dil karodon baar haar gaya hai,
Mujhko neend nahin aati, naa khwab koi dikhta,
Aisa lagta hai ki mujhe tumse pyar hua hai.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 16 April 2019

Rap Song: Ek Baat Bolta hoon.











चल तेरे को मैं एक बात बोलता हूँ,
इन दुनिया वालों की मैं जात बोलता हूँ,
जितना ही तू उठेगा उतना ही ये गिराएंगे,
आज सबके सामने इनकी ये औकात बोलता हूँ।

ना रुकना है ना झुकना है बस चलते रहना है,
नदी के पानी के साथ तुझे बहते रहना है,
मंज़िल तुझे दूर दिखे फिर भी ना घबराना है,
काला अक्षर भैंस बराबर अब नहीं कहलाना है।

दुनिया की फिक्र करेगा तो करता ही रह जाएगा,
पानी से डरेगा तो तैरना कैसे आएगा,
आँसूओं की घूँट को जूस बनाकर पी जा तू,
आँसूओं की ताकत तू तब समझ पाएगा।

चल तेरे को मैं एक बात बोलता हूँ,
आज अपनी ज़िंदगी के मैं राज़ खोलता हूँ,
चाहे कुछ भी बन जाये ज़मीन से जुड़े रहना,
ये लाख पते की बात है तुझे मैं फ्री में बोलता हूँ।

©नीतिश तिवारी।



Saturday, 13 April 2019

मुझे आज़ाद कर दो।
















Pic credit : Google.








जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से
आकर मुझे आज आज़ाद कर दो 
भटकता हूँ बंजारे की तरह
एक शहर से दूसरे शहर
सुलझा के मेरी पहेली खत्म ये फसाद कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज आजाद कर दो 

बढ़ ना पाया तेरी बातों से आगे
निकल ना पाया तेरी वादों से आगे
कोशिश जब भी कि मैंने खुद पर फ़तह पाने की
बड़ी मुश्किल कर जाते तेरे बांधे धागे
इन धागों को आ खुद तोड़, मेरा नया आगाज कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज आज़ाद कर दो 

शायद तुझे फिक्र नहीं है मेरी
पर पागल की तरह करता रहता हूँ
हर समय हर वक्त जिक्र तेरा
मुकम्मल गीत सी थी तुम 
मै था अधूरा सरगम तेरा
फिर से रख के दामन पे हाथ मेरे
पूरा तुम मेरा हर साज कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज आज़ाद कर दो 

मुस्कुराहट पर तेरी मरता था मैं
हो ना जाए तू मुझसे दूर 
इसी बात से डरता था मैं
अब ना वो तेरी मुस्कुराहट रही 
ना ही मेरा डर रहा
और ना ही मेरी मंजिल रही
और ना ही अब मेरा घर रहा
कुछ यादें हैं जिन्हें लिए फिर रहा हूँ मैं
जानता हूँ तुम बेरहम हो
उसी बेरहमी से खत्म उन यादों को आज कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज़ाद कर दो 

©राजकुमार रॉय।

Friday, 12 April 2019

Gazal: Heer Ranjha Aur Ishq.













Pic credit : Google.







खुद को मिटाते रहे उसके नाम के खातिर,
खुद को झुकाया हमने उसके एहतराम के खातिर।

सुना था इश्क़ में हीर राँझा हो जाते हैं,
हमने भी इश्क़ कर लिया इस इनाम के खातिर।

ना मासूमियत की कद्र थी ना रिश्तों की परवाह उसे,
पूरी डाली उसने काट दी एक पके आम के खातिर।

नामुमकिन को मुमकिन करने का उसे बड़ा शौक था,
मुझको भी बर्बाद किया अपने इस अंज़ाम के खातिर।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 10 April 2019

Tum yaad aati ho.














Pic credit : Google.









तुम याद आती हो।

भोर की पहली किरण के साथ
कड़ी धूप की तपन के साथ
बादल से भरे गगन के साथ
रातों में ठंढी पवन के साथ
तुम याद आती हो।

तन्हाई के वीरानों के साथ
महफ़िल के तरानों के साथ
मेरे अनकहे फ़सानो के साथ
हर खूबसूरत नज़रानो के साथ
तुम याद आती हो।

मेरी बचकानी नादानी के साथ
नए दौर की कहानी के साथ
उस रूठी हुई कहानी के साथ
अपनी वो मनमानी के साथ
तुम याद आती हो।

मेरी हर इबादत के साथ
अपनी हर शिकायत के साथ
तेरी मोहब्बत की दावत के साथ
छोटी छोटी शरारत के साथ
तुम याद आती हो।

©नीतिश तिवारी।


Friday, 5 April 2019

नज़राना मोहब्बत का।













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तेरे उड़ते हुए खयालों का मैं एक परिंदा हूँ,
छत पर निकल कर देख, मैं अभी ज़िंदा हूँ।

कोई नज़राना तो पेश कर, मैं अब आ गया हूँ,
धड़कनें तो जरा सुन, मैं तुझमें समा गया हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 3 April 2019

‌बदलते मौसम में प्यार के रंग।












Image courtesy : Google.







‌बदलते मौसम में प्यार के रंग।

‌गर्मी आ गयी है, पर ये मौसम मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता । शायद इसलिए क्योंकि गर्मी की शुरूआत बसंत ऋतु के बाद होती है। बसंत में पेड़ से पुराने पत्ते अलग हो जाते हैं। लेकिन तुम मुझसे अलग होकर फिर मुझमे समाने का नाम नहीं लेती हो। मौसम की तरह खुद को तुमने भी बदल दिया है। कौन से रिवाज़ का चलन शुरू करना चाहती हो। इतना इंतज़ार तो धरती को सूरज भी नहीं करवाता। मेघ की बूंदे धरती पर एक दिन बरस ही जाती हैं। लेकिन तुम्हें तो आँसू का शौक है ना। तो इस शौक को पूरा कर लेना। लेकिन एक बात जान लो, इस बार आँसू मेरे आँखों से भी निकलेंगे। दोनों की मजबूरी यही रहेगी कि आँसू पोछने के लिए एक दूसरे के पास नहीं रहेंगे। पर इसका जिम्मेदार तुम सिर्फ मुझे मत ठहराना। पूछना अपने दिल से कभी कि ये दीवाना तुम्हें कितना प्यार करता है। हाँ, आज भी करता हूँ उतनी ही मोहब्बत। आज भी।

ये भी पढ़िए : एक खयाल- सिर्फ तुम।

©नीतीश तिवारी।

Monday, 1 April 2019

नरेंद्र मोदी दुबारा प्रधानमंत्री बनते हैं तो 2019 के बाद देश में चुनाव नहीं होंगे!






















देश में  चुनावी महौल चल रहा है और हर बार की तरह इस बार भी नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है। कोई अपनी पुरानी विरासत बचाने के लिए जंग लड़ रहा है तो कोई अपनी सरकार के काम गिनाकर जनता से वोट माँग रहा है। और कुछ तो वही पुराना लॉलीपॉप  फिर से देने को कह रहे हैं।

पर इन सबके बीच सवाल ये है कि क्या ये देश में होने वाला आखिरी चुनाव है? क्या इसके बाद हिंदुस्तान में तानाशाही होगी? क्या लोकतंत्र का वजूद समाप्त हो जाएगा? क्या संविधान को बदल दिया जाएगा?

मुझे पूरा विश्वास है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में तानाशाही की कोई जगह नहीं है और होनी भी नहीं चाहिए। लेकिन हाल के दिनों में कुछ नेताओं द्वारा दिये गए बयान इस बहस को जन्म देते हैं।

नेताओं का कहना है कि नरेंद्र मोदी दुबारा प्रधानमंत्री बनेंगे तो 2019 के बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा। मतलब 2024 में फिर से प्रधानमंत्री के लिए चुनाव नहीं होगा और मोदी जी ही कई वर्षों तक राज करेंगे।
व्यक्तिगत तौर पर मैं कहूँ तो मोदी जी को बिल्कुल कई वर्षों तक प्रधानमंत्री बने रहना चाहिए मगर चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के बाद।

इस बहस को जन्म दिया सबसे पहले केजरीवाल ने। केजरीवाल के अनुसार मोदी सरकार का रवैया हिटलर की तरह है। अमित शाह और मोदी की जोड़ी को नहीं हटाया गया तो ये दोनों मिलकर संविधान को बदल देंगे। केजरीवाल बिना किसी तर्क के मोदी जी को हटाने की बात कर रहे हैं सिर्फ इसलिए कि मोदी जी इन्हें पसंद नहीं। इस हिसाब से तो खुद केजरीवाल की मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में है, क्योंकि दिल्ली के लाखों लोगों को ये भी पसंद नहीं हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए, देश के प्रधानमंत्री के बारे में इन्होंने कैसी कैसी भाषा का प्रयोग किया है, हम सभी भलीभांति परिचित हैं।

इसके बाद भाजपा के सबसे विवादित नेता साक्षी महाराज का बयान आया कि 2024 में चुनाव नहीं होंगे। लगता है कि नेताजी सांसद के साथ साथ ज्योतिषी भी हैं। साक्षी महाराज के बयानों का निष्कर्ष निकालें तो पूर्व में भी ये ऐसे ही विवादित बयान देते आये हैं। जिसका कोई तर्क नहीं होता। हर पार्टी में ऐसे नेताओं की कोई कमी नहीं है।

काँग्रेस पार्टी इसमें कहाँ पीछे रहने वाली थी। देश की सबसे पुरानी पार्टी के नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी यही लगता है कि ये देश का आखिरी चुनाव है। इस बात को उन्होंने जोर देकर कहा और पूरे विश्वास के साथ कहा।

सवाल ये है कि आखिर इन नेताओं को क्यों लगता है कि ये आखिरी चुनाव है? सच तो ये है कि विपक्ष के नेता हताशा में ऐसा बयान दे रहे हैं और पक्ष के नेता अति आत्मविश्वास में। लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। किसी पार्टी के चाहने से उसकी सरकार नहीं बनने वाली है। जनता जल्द ही तय करेगी कि 2019 में किसकी सरकार होगी। लोकतंत्र और संविधान बने रहना चाहिए।

जय भारत। जय हिंद।

ये भी पढ़िए : मंदिर वहीं बनाएंगे। मोदी, योगी और राहुल की बातचीत में हुआ खुलासा।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 29 March 2019

इंतज़ार और आचार संहिता।


















अगर शब्दों में पिरो दूँ तुम्हें तो मेरी अमृता हो तुम,
इज़हार कैसे करूँ, चुनावी आचार संहिता हो तुम।


इंतज़ार की घड़ी खत्म हुई अब ऐतबार होगा,
तू जमाने की परवाह मत कर, अब सिर्फ प्यार होगा।


©नीतिश तिवारी।

Thursday, 28 March 2019

एक खयाल.... सिर्फ तुम।













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एक खयाल.... सिर्फ तुम।

तेरी सुनहरी यादों में विचरण करते हुए एक एहसास होता है। हमने रेत पर किले बनाए थे वो ढह गए होंगे। कसूर तुम्हारा था, मेरा था या उस हवा के झोंके का, मालूम नहीं। पर रेत का वो किला बहुत सुंदर था, बिल्कुल तुम्हारी तरह। मोहपाश के बंधन में जकड़ा हुआ प्रेम आखिर कब तक चलता। उसे तो बिखरना ही था, सो बिखर गया। ऊपर से जमाने के ज़ुल्म-ओ-सितम ने हमारे ज़ख्म को और गहरा कर दिया। लेकिन इन ज़ख्मों पर मरहम लगाने को तेरी बातें हैं। मेरे कानों में अभी भी गूँजती हैं तुम्हारी जादुई बातें, वही जो तुमने हमसे कहा था। तुमने कहा था कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ और ताउम्र करती रहूँगी। पर शायद हमारे प्यार की उम्र ज्यादा लंबी ना थी। थोड़ी थी पर हसीन थी। तुमने मुझे जीने का मकसद दे दिया। अगर इसे धोखा कहूँगा तो हमारे प्यार की बेइज्जती होगी। रहने दो, फिर लिखूँगा कभी, और जज़्बात, अपने दिल के हालात। 

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 26 March 2019

काश तुम...













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काश तुम बेवफ़ाई ना करती,
मजबूरियाँ ना गिनाती,
फिर हम एक दूजे के होते,
नदी किनारे सीप से मोती चुगते,
तन्हाई को मात देते,
ख्वाबों में हसीन सपने देखते,
एक दूसरे में समा जाते,
मोहब्बत के गीत गाते।
 उन लम्हों को मैं सहेज पाता,
जो तेरे संग बिताए थे,
उन गलियों में फिर से जा पाता,
जो हमारे मिलन की गवाह थी,
काश!


©नीतिश तिवारी।

Monday, 25 March 2019

तू हुस्न की रानी है।













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तेरी इन आँखों की पूरी दुनिया दीवानी है,
सब लोग तुमपे मरते हैं ये उनकी नादानी है,
इश्क़ तो तुमसे कोई भी कर लेगा क्योंकि,
जमाने को मालूम है कि तू हुस्न की रानी है।

Teri in aankhon ki poori duniya deewani hai,
Sab log tumpe marte hain ye unki naadani hai,
Ishq to tumse koi bhi kar lega kyunki,
Zamane ko maaloom hai ki tu husn ki rani hai.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 24 March 2019

हमने तरक्की कर ली।









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हमने तरक्की कर ली।

घड़े के शीतल जल से नाता अब टूट गया,
प्यूरीफाइड वाटर से नाता अब जुट गया।
कुएँ के पानी की मिठास अब नहीं रही,
शहर के सप्लाई पानी ने उसकी जगह ले ली।
हाँ, हमने तरक्की कर ली।

मिलने जुलने का नहीं है समय किसी के पास,
वीडियो कॉलिंग में जताते हैं अपना होने एहसास।
हाल चाल पूछने में  हमको शर्म आ जाती है,
मिनटों में फेसबुक पर स्टेटस अपडेट हो जाती है।
हाँ, हमने तरक्की कर ली।

पाँव छूने की जगह लोग घुटने छू कर जाते हैं,
पुराने रीति-रिवाज को ये ढोंग बतलाते हैं।
घर में बच्चों के लिए नैनी लगा कर रखते हैं,
बूढे माँ-बाप को वृद्धाश्रम छोड़कर आते हैं।
हाँ, हमने तरक्की कर ली।

लुका छिपी का खेल अब ना जाने कहाँ खो गया,
बच्चों का मनोरंजन वीडियो गेम अब हो गया,
बड़ों का उत्तर देने में पहले हाँ जी हाँ जी करते थे,
अब कुछ भी पूछो तो पब जी खेलते रहते हैं।
हाँ, हमने तरक्की कर ली।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 23 March 2019

शहीदी दिवस 23 मार्च पर कविता।






















शहीदों के बलिदानों का कर्ज हम कैसे चुकाएंगे,
क्या नए हिन्दुस्तान में हम अपना योगदान दे पाएंगे।

वीर सपूतों ने दिलवाई हमें नयी आज़ादी थी,
उनकी वीरता के बदौलत अंग्रेजों की शामत आयी थी।

कितने कष्ट सहे उन्होंने कितनी गोली खाई थी,
भारत माता की खातिर  जान बाज़ी पर लगाई थी।

नमन उन वीर सपूतों को जो हमारे खातिर शहीद हुए,
आज़ाद भारत के लिए फाँसी के तख्ते पर झूल गए।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 20 March 2019

Happy Holi 2019.












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Happy Holi.

कहीं उड़े रंग, कहीं उड़े गुलाल,
होली में लाल हुए हैं सबके गाल,
छुप ना जाना डर से तुम घर के अंदर,
नहीं तो खींचकर ले आएंगे तुम्हें निकाल।

फिर मत करना कोई जवाब सवाल,
रंग लगाकर कर देंगे तुम्हारा बुरा हाल,
फिर नहीं आएगा छुपने का तुम्हे खयाल
क्योंकि हमारे पास है खूब सारा गुलाल।

©नीतिश तिवारी।


Tuesday, 19 March 2019

मंदिर वहीं बनाएंगे। मोदी, योगी और राहुल की बातचीत में हुआ खुलासा।


















मंदिर वहीं बनाएंगे। मोदी, योगी और राहुल की बातचीत में हुआ खुलासा। 

"अरे मोदी जी, यहाँ अपने आवास पर यूँ अचानक क्यों बुलाया।" राहुल गाँधी ने सरप्राइज़ लुक देते हुए पूछा।
"तुम ज़िन्दगी भर पप्पू ही रहोगे, चुनाव आ गए, तुम्हें कुछ होश नहीं कि कैसे क्या करना है। बस राफेल का भूत सवार हो गया है।" मोदी जी ने डाँटते हुए कहा।
"नहीं सर, मैं तो जब से कांग्रेस का अध्यक्ष बना हूँ,  अप्रत्यक्ष रूप से आपका ही प्रचार कर रहा हूँ, और अब तो बहन प्रियंका भी है हमारे साथ।" 
"हाँ, राहुल ये तुमने अच्छा किया जो प्रियंका को भी साथ ले आये। बाकी सारे विपक्ष को पता ही नहीं चलेगा की तुम दोनों भाई बहन अंदर से भाजपाई ही हो।"
"भाजपाई नहीं सर, संघी, अब तो मैं भी अपने आप को संघ का आदमी मानता हूँ, वो बात अलग है कि मैं खाकी नेकर नहीं पहनता।"
राहुल गाँधी के इसी कथन के साथ राहुल और मोदी दोनों ठहाके मारकर हँसने लगते हैं। 
राहुल ने फिर से सवाल किया, " लेकिन ये क्या मोदी जी, मीटिंग में हम दो ही लोग, आपने तो बोला था कि तीन लोग होंगे, तीसरा कौन है?"
मोदी जी ने राहुल की पीठ पर थपथपाया और बोला , "इतना बेचैन क्यों हो रहे हो शहजादे,  इटली जाना है क्या? तीसरा आता ही होगा।"
इसी बीच दरवाजे पर जय श्री राम का उदघोष होता है। अरे ये क्या, ये तो अपने योगी जी हैं। 
"जय श्री राम योगी जी, आइये, आइये, ये अपना राहुल आपसे मिलने को बेचैन हो रहा था।" मोदी जी ने राहुल की तरफ इशारा करते हुए बोला। 
" जय श्री राम योगी जी, कैसे हैं आप?" राहुल ने नमस्ते करते हुए पूछा। 
"अरे  हम तो ठीक हैं, तुम बताओ, जनेऊ पहनना भूले तो नहीं हो ना?"
"नहीं योगी जी, जब से आपके साथ रहकर ज्ञान मिला है, तब से मैं भी जनेऊधारी पंडित हो गया हूँ"
"तुम दोनों चुप रहो। जिस काम के लिए आये हो उस पर बात करो।" मोदी ने दोनों को डाँटते हुए कहा।
"हाँ जी योगी जी और शहज़ादे, तो मंदिर बनाने का कार्यक्रम 2019 के चुनाव के बाद का तय हुआ है। तुम दोनों अपनी सभी चुनावी सभा में इस पर कोई बात नहीं करना। जनता बहुत सवाल करेगी, चुप रहना है। "
मोदी जी ने 30 हज़ार किलोग्राम वाले मशरूम खाते हुए दोनों को आदेश दिया और अपने कमरे की तरफ चल दिये। थोड़ी देर में राहुल और योगी जी ने भी अपनी अपनी कप से चाय खत्म करके बाहर निकले और दोनों ने एक सुर में कहा कि " मंदिर वहीं बनाएंगे।"

©नीतिश तिवारी।