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गीत।

मैं भी अधूरा जीने लगा हूँ,
तेरे ही खयालों में,
बढ़ने लगी है उलझन मेरी,
तेरे ही सवालों में।

तुझे पाने की चाहत मेरी,
अपना बनाने की आदत मेरी,
बड़ी मुश्किल है कैसे बताएँ,
तू ही है अब राहत मेरी।

मैं भी अधूरा...

जीना मैं तो तुझसे सीखा,
हर बारिश में मैं हूँ भीगा,
चैन मुझे मिल जाए अब तो,
दर्द लगे है अब ये मीठा।

मैं भी अधूरा ....

©नीतिश तिवारी।