Sunday, 17 November 2019

मैं भी अधूरा...

Pic courtesy: Pinterest.









गीत।

मैं भी अधूरा जीने लगा हूँ,
तेरे ही खयालों में,
बढ़ने लगी है उलझन मेरी,
तेरे ही सवालों में।

तुझे पाने की चाहत मेरी,
अपना बनाने की आदत मेरी,
बड़ी मुश्किल है कैसे बताएँ,
तू ही है अब राहत मेरी।

मैं भी अधूरा...

जीना मैं तो तुझसे सीखा,
हर बारिश में मैं हूँ भीगा,
चैन मुझे मिल जाए अब तो,
दर्द लगे है अब ये मीठा।

मैं भी अधूरा ....

©नीतिश तिवारी।



17 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवावार 17 नवम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. प्रेम और समर्पण का सुन्दर समागम.
    सुन्दर सृजन
    सादर

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  3. बहुत बढ़िया...!

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  4. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (18-11-2019) को "सर कढ़ाई में इन्हीं का, उँगलियों में, इनके घी" (चर्चा अंक- 3523) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं….
    *****
    रवीन्द्र सिंह यादव

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    1. रचना शामिल करने के लिए शुक्रिया।

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  5. आदरणीय नीतीश जी, ख्याल जब खूबसूरत हो तो उलझणें कैसी, तन्हाई क्यूँ? साथ पाना हो त खुद को उनमें खोना होता है। सुन्दर ख़्यालों को बुनती खूबसूरत रचना।

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    1. जी सही कहा आपने। धन्यवाद।

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  6. बहुत सुंदर रचना

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  7. Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  8. सुन्दर रचना

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