Friday, 19 July 2019

Kahin der na ho jaye.













Pic credit : pinterest.






तू जो मुस्कुराए तो मौसम में बहार आ जाए,
बंजर जमीन में भी बरखा की फुहार आ जाए,
मोहब्बत गर है तो फिर इज़हार कर दे,
कहीं देर ना हो जाए और  इतवार आ जाए।

Tu jo muskuraye toh mausam mein bahar aa jaye,
Banjar zameen mein bhi barkha ki gujaar aa jaye,
Mohabbat gar hai toh for izhaar kar de,
Kahin der na ho jaye aur it waar aa jaye.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 16 July 2019

बेवफ़ाई ने मशहूर कर दिया।








Pic credit : Pinterest.









मेरे इश्क़ ने तुम्हें जन्नत का हूर कर दिया,
जमाने भर के सामने हमें मजबूर कर दिया,
अफ़साना अंजाम तक ना पहुँचा तो क्या,
तुम्हारी बेवफाई ने मुझे मशहूर कर दिया।

Mere ishq ne tumhen jannat ka hoor kat diya,
Jamane bhar ke samne humen majboor kar diya,
Afsana anzaam tak naa pahuncha to kya,
Tumhari bewfai ne mujhe mashhoor kar diya.

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 13 July 2019

कविता- बरसात और मुलाकात ।



















वो आषाढ़ का पहला दिन था 
मगर मैं अज्ञात उनसे मिलने चला 
टिक-टिकी 4:45 की ओर इशारा कर रही थी 
घनघोर घटा उमड़ रहे थे 
मानो उनका भी मिलन महीनों बाद आज ही होने वाला था 
वैसे मैं भी महीनों बाद ही मिलने वाला था
इंतज़ार के लम्हे तन्हाईयों के आगोश में लिपटे मुझसे परिचय कर रहे थे 
टिक - टिकी के गति से तेज धक-धक की बेचैन करने वाली आवाज सुनाई देने लगी जैसे ही दूर से उनकी आहटों का एहसास हुआ 
रोम रोम पुलकित हो उठा
तभी नभ से एक बूंद मेरे बालों को चूमता हुआ ललाट तक आ पहुँचा 
मानो जैसे वहाँ भी मिलन बस होने ही वाला था 
वो मेरे और नज़दीक आ रही थी 
मगर मैं एक ही जगह अपने पाँव को अंगद की भाती जमाये खड़ा था 
मेरे हाथों में जो गुलाब की पंखुड़ियों का समूह था वो सतह को चूमने वाला ही था तभी एक और बूंद मेरे हाथों को अपना एहसास करने में सफल रहा और पंखुड़ियों के समूह को सतह पर बिखरने से रोक दिया 
अब वो मेरे करीब थी और मैं खुशी घबराहट और हिचकिचाहट से अपना परिचय करा रहा था 
तभी उन्होंने मेरे हाथों से पंखुड़ियों का गुच्छा लिया और अचानक से बादल भी टूट पड़े 
वो आषाढ़ का पहला दिन था ।।

ये भी पढ़िए: इश्क़ का ठिकाना।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Tuesday, 9 July 2019

Zindgi ishq aur tum.


Pic credit : Pinterest.





करते रहे हम उम्र भर ज़िंदगी से शिकवा,
फिर मौत से सामना हुआ और ज़िंदगी रूठ गई।

Karte rahe hum umr bhar zindgi se shikwa,
Fir maut se saamna hua aur zindgi rooth gayi.

सफर में हमसफर मिले और ज़िंदगी सँवर जाए,
ऐसा हसीन सपना मैंने देखा था एक रोज।

Safar mein humsafar mile aur zindgi sanwar jaye,
Aisa haseen sapna maine dekha tha ek roj.

©नीतिश तिवारी।





Sunday, 7 July 2019

लघुकथा- ट्रेन का सफर।

















लघुकथा- ट्रेन का सफर।

ट्रेन खुले हुए दो घंटे बीत चुके थे। अभी रात भर का सफर बाकी था। वो सामने वाली सीट पर पिछले दो घंटे से बैठकर किताब पढ़ रही थी। कभी कभी हमारी नजरें मिल जाती थी। जब आप एक लेखक हों और आपके सामने कोई किताब पढ़ रही हो तो बात करने की उत्सुकता तो हो ही जाती है। 

हिम्मत करके मैंने पूछ ही लिया, " बड़े ध्यान से आप घंटों से ये किताब पढ़ रही हैं। किस बारे में है ये किताब?"
पहले तो उसने हैरानी से मुझे देखा। फिर जवाब दिया, "कुछ खास नहीं लेकिन आप क्यों पूछ रहे हैं?"
मैंने कहा," मैं भी एक लेखक हूँ और अपनी पहली नॉवेल लिख रहा हूँ।"
फिर उसने मुझे बधाई दी। 

अगले कुछ घंटों में हमलोग काफी घुल मिल गए थे। डिनर भी हमने साथ में किया। चूंकि उसे पहले उतरना था इसलिए मुझे सोने से पहले आगे की बात करनी थी। मैंने कहा, "आपने अपना नाम नहीं बताया अभी तक।"
उसने कहा, "मैं सिमरन और आप?"
"जी, मैं राज।"
वो थोड़ी देर के लिए खामोश हो गयी। शायद DDLJ का सीन याद कर रही होगी। 
अगले ही पल उसकी खामोशी को तोड़ते हुए मैंने कहा,"आपने हमारी दोस्ती की किताब में पहला चैप्टर तो लिख दिया। लेकिन हम इस किताब को पूरा करना चाहते हैं।"  वो मेरा इशारा समझ गयी थी। उसने अपनी पर्स से एक पन्ना निकाला उस पर अपना नंबर लिखा और मुझे देते हुए कहा, " ये लीजिये, ये आपको आपकी किताब पूरी करने में मदद करेगा।" इतना कहकर उसने गुड नाईट बोला और सोने के लिए चली गयी।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 3 July 2019

मोहब्बत का हिसाब मिलेगा।

























Pic credit : Pinterest.



खोखले वादे करने का तुम्हें खिताब मिलेगा,
मोहब्बत में सितम जो किए उसका हिसाब मिलेगा,
मेरी तड़प देखकर अब तुम्हें हैरानी हो रही है,
परेशान मत हो, एक दिन इसका भी जवाब मिलेगा।

Khokhle wade karne ka tumhen khitab milega,
Mohabbat mein sitam jo kiye uska hisab milega,
Meri tadap dekhkar ab tumhen hairani ho rahi hai,
Pareshan mat ho, ek din iska bhi jawab milega.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 30 June 2019

Shayari- Mohabbat ka Dastoor.

























Pic courtesy : Google.





बिछड़ना मिलना मिलकर बिछड़ना,
तुम्हें खोकर भी तेरा हो जाना,
मोहब्बत का दस्तूर ही कुछ ऐसा है,
गलतफहमी को भी सच मान लेना।

Bichhadna milna milkar bichhadna,
Tumhen khokar bhi tera ho jana,
Mohabbat ka dastoor hi kuch aisa hai,
Galatfahmi ko bhi sach maan lena.

©नीतिश तिवारी।


Saturday, 29 June 2019

तुम्हें पता है?

























Pic credit : pinterest.









मैं अपनी हर बात यूं ही तुमसे नहीं कहता ..
तुम्हें पता है .?? जब मैं तुम्हारे पास होता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

तुम्हें खोने का ख्याल आते ही ..
आंसू बहाता हूं पैर पटकता हूं ..
जुल्फें बिखर जाती हैं चेहरा बिगड़ आता है..
ये बेचैनी मैं यूं ही नहीं सेकता
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे याद करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

दिल की गुल्लक में तेरी हर यादें सहेजे रखा हूं
पर तेरी बेपरवाही देख मैं हक्का-बक्का हूं
जब भी आईने के आगे जाता हूं
तो अपने सामने तुझे ही पाता हूं।।
हवाओं के साथ मैं अब यूं ही नहीं बहता 
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे मेहसूस करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

जब तू सामने से गुजरती है..
मेरी जान पर आ पड़ती है
मिसाल है तू खुदा की बेहतरीन कारीगरी की
तुझे देखना मानो दीदार हो किसी परी की..
इश्क, मोहब्बत, चाहत का पहाड़ यूं ही नहीं मुझपे ढेहता।।
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे देखता हूं..
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

Thursday, 27 June 2019

रूह से मोहब्बत।

























Pic credit : Google.






रूह से रूह की मोहब्बत करोगे तो अच्छा होगा,
तुम हुस्न के करीब मत जाओ, बर्बाद हो जाओगे।

Rooh se rooh ki mohabbt karoge to achha hoga,
Tum husn ke kareeb mat jao, barbaad ho jaoge.

ना गवाह, ना वकील फिर भी सजा उम्रकैद की,
इश्क़ में मुकदमे का अंजाम ऐसा ही होता है।

Na gawah, na wakil fir bhi saja umrquid ki,
Ishq mein mukadame ka anjaam aisa hi hota hai.

ये भी पढ़िए : इश्क़ का ठिकाना।

©नीतिश तिवारी।


Sunday, 23 June 2019

Tum kya jano dard kya hota hai!










Pic credit : Unspoken Voice.







तुम क्या जानो दर्द क्या होता है,
छोटा बच्चा भूख से क्यों रोता है,
इंसान पापी पेट के लिए क्या करता है।

तुम्हें तो बस बंगला गाड़ी पैसा चाहिए,
मेरे जैसा नहीं उसके जैसा चाहिए,
गर्मी में सर्दी और सर्दी में वर्षा चाहिए।

कितनी अजीब ख्वाहिशें हैं तुम्हारी,
हालात को समझ नहीं पाते हो तुम,
सात सुरों की तो धुन ही होती है,
फिर आठवाँ सुर क्यों लगाते हो तुम।

मेरी काबिलियत पर भरोसा रखो,
सब कुछ ठीक कर दूँगा मैं,
फिर मुझे कोई शिकायत ना होगी,
सब कुछ ठीक कर दूँगा मैं।

©नीतिश तिवारी।