Wednesday, 11 December 2019

Laghukatha- Naseeb Apna Apna

Naseeb apna apna

Pic credit: Pinterest.












"असलम भाई एक चाय देना।" 
दिसम्बर की ठंड में सुबह 6 बजे मैंने काँपते हुए कहा।
"ये लीजिए तिवारी जी।"
"अरे बिस्कुट भी तो दो।"
"कौन सा?"
"वही अपना पुराना वाला पर्लेजी।"
चाय की पहली घूँट लेकर मैं बिस्कुट का रैपर फाड़ ही रहा था कि उधर से एक मोहतरमा बैग लटकाए और गले में आई कार्ड डाले आई। 
शायद ऑफिस जा रही थी।
"भईया एक मर्बोलो लाइट्स और एक चाय"
मोहतरमा ने असलम भाई से माँगा।
असलम भाई के लिए ये बिल्कुल नया नहीं था और होता भी तो वो दुकानदार थे इसलिए उन्होंने सिगरेट और चाय पकड़ा दिया। 
मैं भी इधर चाय की चुस्की के साथ व्यस्त हो गया था।
इतने में एक कुत्ता भौंकते हुए मोहतरमा की तरफ आया। शायद पुरानी जान पहचान रही होगी। लड़की कुत्ते को पुचकारने लगी तब तो मुझे पूरा यकीन हो गया कि पुरानी जान पहचान ही थी।
लेकिन कुत्ता फिर भी भौंके जा रहा था।
लगभग दो मिनट बाद लड़की ने असलम से गुड डे बिस्कुट माँगा और कुत्ते को खाने के लिए सड़क पर बिखेर दिया। उधर कुत्ता बड़े चाव से बिस्कुट खाने लगा। लड़की सिगरेट फूँक कर जा चुकी थी। मैं और असलम भाई मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 10 December 2019

प्रेम गीत- काजल को स्याही बनाके।

प्रेम गीत- काजल को स्याही बनाके।





                  






















Photo courtesy: Pinterest










तेरी आँखों के काजल को स्याही बनाके लिख दूँ,
मैं अपनी ग़ज़ल में तुझको हमराही बनाके लिख दूँ।

तेरी पायल करती शोर है हम जब भी मोहब्बत करते हैं,
इस पायल की छन छन को गवाही बनाके लिख दूँ।

चाँद करता रहता है पहरा, पूर्णिमा की रात को,
तुम कहती हो तो चाँद को सिपाही बनाके लिख दूँ।

गुनाह है मोहब्बत में अगर छुप छुप कर मिलना,
फिर मैं भी अपने को अपराधी बनाके लिख दूँ।

©नीतिश तिवारी।

Also Read: मेरी पहली किताब- फिर तेरी याद आई।

Saturday, 7 December 2019

लघुकथा- कौन हो आदर्श?


Picture courtesy: Google.





          

राम प्रसाद जी को फिर से  पंचायत के मुखिया के तौर पर चुन लिया गया था। गाँव और समाज में युवाओं के बढ़ते हुए प्रभाव के कारण उन्होंने तय किया कि इस बार की पहली बैठक से ही युवाओं को शामिल किया जाएगा। बैठक शुरू हुई जिसमें पंचायत के बुजुर्ग और युवा भी शामिल थे। 
"युवा शक्ति की ताकत बहुत बड़ी होती है। मैं चाहता हूँ कि पंचायत के सभी बच्चों और युवाओं के हाथ में भगत सिंह की किताब हो। सबको पता चलना चाहिए कि सुभाष चंद्र बोस ने आज़ादी की लड़ाई में कितना सार्थक योगदान दिया था। अगर चंदा करना पड़े तो करो लेकिन सबके पास आज़ादी की लड़ाई में शहीद हुए वीर सपूतों की कहानी पहुँचनी चाहिए।" राम प्रसाद जी ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा।
जैसे ही उन्होंने अपना वक्तव्य खत्म किया तो पीछे से एक युवा भाई ने पूछा , "और नाथूराम गोडसे?"
रामप्रसाद जी और बाकी पंचायत के सदस्य सोंच विचार में पड़ गए थे। 

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 3 December 2019

Change your way of thinking.

Change your way of thinking.

Photo credit: Pinterest 







Depending on the situation
You judge the people
Is that your real judgement
Or a result of any fiction

You always walk in one side
Not aware about the other side
Ignoring the facts and figures
You present the data which is
Like a prime member 
And that cannot be divide

Don't always expect heads
When you flip the coin
It also gives you tail
Change your thinking 
Change your view
Otherwise you'll only get hell.

Also read: It's about you my love.

©Nitish Tiwary.


Saturday, 30 November 2019

मेरी पहली किताब- फिर तेरी याद आई।

Phir teri yaad aayi by nitish tiwary









2013 में जब इस ब्लॉग का निर्माण किया था और लेखन शुरू किया था तो कभी नहीं सोचा था कि एक किताब भी लिखूँगा। 
मेरी पहली किताब 'फिर तेरी याद आई' को मैंने इसी वर्ष सितम्बर के महीने में अमेज़न किंडल पर पब्लिश किया था। बड़े हर्ष के साथ आपको सूचित कर रहा हूँ कि मेरी किताब अब पेपरबैक फॉर्मेट में भी उपलब्ध है। Notion Press ने इसे छापा है। इसके लिए इनका आभार व्यक्त करता हूँ। 

लेखन के क्षेत्र में उत्साह बढ़ाने के लिए सभी पाठकों, मित्रों  और रिश्तेदारों का शुक्रिया। एक रोमांटिक फ़िक्शन उपन्यास पर भी काम कर रहा हूँ। उसके लिए भी आप सभी का आशीर्वाद चाहूँगा। 

आप किताब यहाँ से आर्डर कर सकते हैं।
धन्यवाद।

©नीतिश तिवारी।


Friday, 29 November 2019

Tum kya jano

Pic credit : Pinterest.








तुम क्या जानों आशिक़ कैसे दिल को समझाते हैं,
दिल टूटने पर आँसुओं की बारिश से भींग जाते हैं,
लोग बेवफ़ाई के चर्चे कितने भी करें मगर,
उस बेवफ़ा का नाम कभी जुबाँ पर नहीं लाते हैं।

Tum kya jano ashiq kaise dil ko samjhate hain,
Dil tootne par aasuon ki barish se bheeg jate hain,
Log bewfai ke charche kitne bhi karen magar,
Us bewfa ka naam kabhi juban par nahin laate hain.

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 21 November 2019

तुम्हारी ख्वाहिशें और मेरे सपने।

तुम्हारी ख्वाहिशें और मेरे सपने।

pic courtesy: pinterest











तुम्हारी ख्वाहिशें और मेरे सपने।

सर्दी नहीं पड़ रही है इस बार, जानती हो क्यों? क्यूँकि हमारे रिश्तों में गर्माहट नहीं है। तुम्हारे खयाल, तुम्हारी ख्वाहिशें, तुम्हारे उसूल, सब वाज़िब हैं। लेकिन मेरे सपनों की तिलांजली देकर तुम्हें ख़्वाब देखने का कोई हक़ नहीं है। मेरे अरमानों की चिता जलाकर तुम अपनी ख्वाहिशें पूरा नहीं कर सकती। रेल की पटरियों की तरह बनने की कोशिश मत करो। बनना है तो समंदर बनो जिसमें तुम्हारी ख्वाहिशों की गहराई होगी और उस गहराई में डूबकर मैं अपने सपनों को पूरा कर सकूँगा। बस इतना ही। 

Love You 


‌©नीतिश तिवारी।



Sunday, 17 November 2019

मैं भी अधूरा...

Pic courtesy: Pinterest.









गीत।

मैं भी अधूरा जीने लगा हूँ,
तेरे ही खयालों में,
बढ़ने लगी है उलझन मेरी,
तेरे ही सवालों में।

तुझे पाने की चाहत मेरी,
अपना बनाने की आदत मेरी,
बड़ी मुश्किल है कैसे बताएँ,
तू ही है अब राहत मेरी।

मैं भी अधूरा...

जीना मैं तो तुझसे सीखा,
हर बारिश में मैं हूँ भीगा,
चैन मुझे मिल जाए अब तो,
दर्द लगे है अब ये मीठा।

मैं भी अधूरा ....

©नीतिश तिवारी।



Friday, 15 November 2019

Dard Shayari.

Dard shayari






महकती हुई ख़त में, मुरझाया वो गुलाब होगा,
जो आने वाला कल है वो लाजवाब होगा,
तुझे देखना है बहुत कुछ अभी ज़िन्दा रह,
तेरे दिए हुए एक एक दर्द का हिसाब होगा।

Mahakti hui khat mein murjhaya wo gulab hoga,
Jo aane wala kal hai wo lajawab hoga,
Tujhe dekhna hai bahut kuch abhi zinda rah,
Tere diye huye ek ek dard ka hisaab hoga.

©नीतिश तिवारी।

Monday, 11 November 2019

सौंदर्य की साधना।

सौंदर्य की साधना
Pic credit: Pinterest.










सौंदर्य की साधना।

काली घटा है घनघोर,
बिजली का भी है शोर,
सियाह-रात ऐसी है कि,
मन व्याकुल है विभोर।

पंख नहीं है उड़ने को,
होश नहीं है चलने को,
वो लथपथ है हुआ बेहाल,
साँस आयी है रुकने को।

पथ पर चलना गिरकर उठना,
करता रहा सौंदर्य की साधना,
आँसू उसके ऐसे बहते,
जैसे कोई गिरता हुआ झरना।

कर्म की ज्योत जलाने को,
निकला था भवसागर पार,
भाग्य की रेखा ऐसी पलटी,
खत्म हो गया जीवन संसार।

©नीतिश तिवारी।

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