Monday, 4 November 2019

ये घड़ी है सुखद मिलन की।

Romantic poem

Pic credit : Pinterest.










सम्बन्ध विच्छेद
करोगे तुम तो
प्रेम प्रगाढ़
कैसे होगा।

पूनम की रात
आ गयी है
ये जिस्म 
एक जान
कैसे होगा।

तुम्हें जो भी
शिकायत है
उसे टाल दो
थोड़ी देर को।

ये शब आज
बर्बाद ना करो
रुक जाने दो
घड़ी के फेर को।

हठ लगाए बैठे हो
ना जाने कौन सी
ज़ुल्म-ओ-सितम की
मैं उसे भी सुन लूँगा
पर ये घड़ी है
सुखद मिलन की।

कितनी सदियाँ बीत गयी
उसके बाद तो आये हो
नखरे भी तेरे सह लूँगा
क्योंकि तुम ही
 रूह में समाये हो।

©नीतिश तिवारी।





10 comments:

  1. वाह! बहुत खूब!

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 05 नवम्बर 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. रचना शामिल करने के लिए आपका धन्यवाद।

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (06-11-2019) को     ""हुआ बेसुरा आज तराना"  (चर्चा अंक- 3511)     पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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  4. लाज़वाब प्रस्तुति

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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