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Hum Vartaman Mein Jee Kyon Nahin Paate?| हम वर्तमान में जी क्यों नहीं पाते?
















मैं ये भी नहीं कह सकता कि मैं खुश हूँ। मेरा दुख ये भी नहीं है कि मुझे वो सब नहीं मिला जो मुझे चाहिए था। दरसअल बात इतनी सी है कि एक वक़्त के बाद चीजों की अहमियत बदल जाती है। बचपन में जिस बात से हम खुश होते थे वो जवानी में हमें अच्छे नहीं लगते। जवानी का रोमांच बुढापे तक खो जाएगा। सच्चा सुख तो वर्तमान को जीने में ही है।

पर दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति ये है कि मनुष्य वर्तमान में कम ही जी पाता है। भूतकाल की गलतियों को मन ही मन दोहराता रहता है और भविष्य की चिंता करता रहता है। परिस्थिति और भाग्य हर किसी के अलग-अलग होते हैं। इन्हीं के बीच सामंजस्य बैठाने की कला को जीवन कहते हैं। 

©नीतिश तिवारी।

 

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