Thursday, October 8, 2020

बेटा या बेटी --समाज की सच्चाई।

Pic credit : pinterest.




घरवाले परेशान हैं उनकी तबियत देखकर,
लोग मिलने आ रहे हैं उनकी हैसियत देखकर,
बेटी होती तो आज रोने लगती बाप के हश्र पर,
बेटे ने आने से मना कर दिया वसीयत देखकर।

Gharwale pareshaan hain unki tabiyat dekhkar,
Log milne aa rahe hain unki haisiyat dekhkar,
Beti hoti toh aaj rone lagti baap ke hasrr par,
Bete ne aane se mana kar diya wasiyat dekhkar.

©नीतिश तिवारी।


 

8 comments:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 09-10-2020) को "मन आज उदास है" (चर्चा अंक-3849) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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    1. मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  2. जीवन बहुत व्यावहारिक हो गया है.

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  3. छोटी पर सार्थक रचना।
    हृदय स्पर्शी।

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