Thursday, October 31, 2013

Happy Diwali



  कल मैं दीवाली की छुट्टी में अपने घर daltonganj (jharkhand)जा रहा हूँ इसलिए आप सभी से कुछ दिनो तक मुखातिब नही हो पाऊँगा.

काफ़ी लंबे अंतराल के बाद घर जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. आप सभी के प्यार और आशीर्वाद के लिए आपका आभारी हूँ. ऐसे ही अपना प्यार बनाए रखिए. 
मेरे सभी दोस्तों और ब्लॉग रीडर्स को दीपावली की हार्दिक शुभकामना.

HAPPY DIWALI

Sunday, October 27, 2013

शराब शबाब और तेरी याद.















देना चाहता था मैं तुझे एक गुलाब,
किया तूने इनकार और हुए हम बेनकाब,
चाहत थी मेरी ओढ़ लेता मैं तेरा शबाब,
पर अब मयखाने में बैठकर पी रहे हैं शराब.

मेरे दिल के कोने से एक आवाज़ आती है,

कहाँ गयी वो ज़ालिम जो तुझे तड़पाती है,
जिस्म से रूह तक उतरने की थी ख्वाहिश तेरी,
और अब एक शराब है जो तेरा साथ निभाती है.

ना थी उम्मीद ना वादे पर ऐतबार किया,

ग़ज़ब है तेरा फिर भी हमने इंतज़ार किया,
तेरे उस कातिल अदाओं को भूलने की खातिर,
हर रोज़ हर वक़्त हमने शराब पिया.

मैं तो पहले भी था महफ़िल में,

मैं तो अब भी हूँ महफ़िल में,
फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि,
पहले तुम थी,अब ये शराब है महफ़िल में.

Saturday, October 26, 2013

एक शाम बेवफाई के नाम।





मेरे दिल की तिजोरी में बैठकर वो,
चुरा लेता है मेरी साँसों को हर रोज़.

कभी सुर्ख आँखों में पानी देते हैं,
कभी अपने प्यार में नीलामी देते है,
रज़ा पूछकर सज़ा देने वाले,
ज़िंदगी भर की बदनामी देते हैं.

इससे पहले की हम गुमनाम हो जाते,
उस बेवफा ने सरेआम बदनाम कर दिया.

तेरी मोहब्बत तो एक तिजारत थी,
पर तुमने इसे एक गैरत बना दिया,
दिल की बात लफ़्ज़ों तक आने से पहले,
बेवफ़ाई को तुमने एक हक़ीकत बना दिया.

Friday, October 25, 2013

चाँदनी रात,सर्द मौसम और तुम।















याद आती है मुझे 
वो पूस की रात ,
जो गवाह थी ,
हम दोनों के मिलन की। 

मैं था ,तुम थी ,
और फलक पे था चाँद ,
अपनी गरिमा बिखेरे हूए,
अपनी लालिमा समेटे हूए

सुनायी देती है मुझे ,
तुम्हारे दिल कि धड़कन ,
जो हर पल जुड़ रही थी ,
सिर्फ मेरे धड़कन से। 

महसूस होती है मुझे ,
वो हर एक साँस ,
जिसमे गरमी थी सिर्फ ,
तुम्हारे साँसों की। 

तेरे चेहरे का आकर्षण ,
तेरे बदन कि खुशबू ,
खींच रहा था मुझे ,
एक अटूट बंधन कि ओर। 

तुम्हारा स्नेह ही तो था,
जो मेरे साथ था,
एक तुम ही तो थी,
जिसे अपना कहा था। 

पर टूट गया वो बंधन ,
किसी नाजुक धागे की तरह ,
अब नहीं रहा वो  संगम,
सच्चे वादों की तरह। 

पर फिर आयेगा वो मौसम ,
नए अफ़साने की तरह ,
और फिर होगा पुनर्मिलन ,
नए फ़साने की तरह। 

प्यार के साथ 
आपका नीतीश। 

Thursday, October 24, 2013

मेरी मोहब्बत--उनकी बेवफ़ाई


अश्क के हर एक बूँद को मोती बनाना चाहता हूँ,
दर्द भरे अपने ज़ख़्मों को अब हटाना चाहता हूँ.

ये जानते हैं हम की पास नही कोई दरिया,
इस रूह के प्यास को फिर भी बुझाना चाहता हूँ.

महलों में रहने वाले हमारे दर्द को क्या जाने,
इस झोपड़ी में रहकर ज़िंदगी गुज़रना चाहता हूँ.

शायद हमारे प्यार पर उनको ना कुछ यकीन था,
फिर भी उनका हरेक नगमा अब गुनगुनाना चाहता हूँ.

इस बेदर्द सी दुनिया में एक उनका ही तो साथ था,
जब तोड़ दिया दिल मेरा अब भूल जाना चाहता हूँ.

मुद्दतो से देखा नही चेहरा किसी हसीन का,
अब पास तेरे आकर तुम्हे निहारना चाहता हूँ.

दिल पर ज़ख़्म ऐसे मिले रहकर साथ उनके,
इन ज़ख़्मो पर अब मैं मरहम लगाना चाहता हूँ.

रंगों की इस बाहर में अदाएँ तेरी अजीब है,
अपनी जीत को भी अब मैं हार बनाना चाहता हूँ.

एक रात उनसे बात हुई कुछ हमारे प्यार की,
उस रात भर रोने के बाद अब मुस्कुराना चाहता हूँ.

भूल कर उनके दर्द हो हमने तुम्हारा रुख़ किया,
इस बेवफ़ाई के गम को हर पल मिटाना चाहता हूँ.

मेरी ज़िंदगी के हर एक ज़ख़्म अब भरने लगे हैं,
आ तुझे ओ दिलरुबा अपनी ज़िंदगी बनाना चाहता हूँ. 


  प्यार के साथ
 आपका नीतीश

Tuesday, October 22, 2013

शुभकामना -करवाचौथ की .

Pic credit: Google.


 आज फिर आया है मौसम प्यार का,
ना जाने कब होगा दीदार चाँद का,
पिया मिलन की रात है ऐसी आयी ,
आज फिर से निखरेगा रूप मेरे यार का। 

दिल मेरा फिर से तेरा प्यार माँगे ,
प्यासे नयना फिर से तेरा दीदार माँगे ,
प्रेम,स्नेह से प्रकाशित हो दुनिया मेरी ,
ऐसा साथी पूरा जग संसार माँगे। 

©नीतिश तिवारी।

Monday, October 21, 2013

ना जाने क्या लिखूँ।


















कुछ अल्फ़ाज़ लिखूँ, 
कुछ ज़ज़्बात लिखूँ,
ना जाने क्या ख्वाब लिखूँ। 

अपने आँसू लिखूँ,

अपनी खुशी लिखूँ, 
ना जाने क्या हालात लिखूँ। 

तेरी वफ़ा लिखूँ ,

तेरी जफ़ा लिखूँ ,
ना जाने क्या सौगात लिखूँ। 

कभी पतझड़ लिखूँ ,

कभी सावन लिखूँ ,
ना जाने क्या मौसम लिखूँ। 

कभी तुझे लिखूँ ,

कभी उसे लिखूँ ,
न जाने मैं किस  किसको लिखूँ। 

©नीतिश तिवारी।

Sunday, October 20, 2013

एक अंज़ाम














बिखर रहा है ज़माना,
रो रहा है मेरा प्यार,
उजड़ रही है खुशियाँ,
हँस रहा है अंधकार.

हर तस्वीर हुई धुँधली,
हर तकदीर हुई पुरानी,
दास्तान हुई और लंबी,
अब नही बची मेरी कहानी.

भटक रहा हूँ राहों मे,
ना जाने कैसा अंज़ाम था,
तड़प रहा हूँ हर साँसों मे,
ना जाने ये किसका गुलाम था.

सुलग उठी है चिंगारी,
मचल रहे हैं अरमान,
कह रही है धड़कन,
ये तो बस है इम्तिहान.

प्यार के साथ
 आपका नीतीश

Saturday, October 19, 2013

शायरी संग्रह

















हर शाख पे बैठी थी उम्मीदें पैर पसार,
कब टूट गयी वो डाली पता ही ना चला.

ना खुद पर यकीन है ना तुझ पर ऐतबार है,
इस मोहब्बत ने कर दिया जीना दूस्वार है,
कशमकश मे है हालत अब मेरे,
ना तुम ही गैर हो ना अपनों से ही प्यार है.

राही को मंज़िल नही,कश्ती को साहिल नही,
किसी के तुम नही, किसी के हम नही,
अजीब दास्तान है ,इस बेदर्द जमाने का,
कोई दिल में नही, कोई दिल से नही.

ना देखा ऐसा रूप ना देखी ऐसी श्रिगार,
तेरे चेहरे की हँसी मे है खुशियाँ अपार,
सच हो गये मेरे सपने अब तुम पर है ऐतबार,
लोग कहते हैं की यही है सच्चा प्यार.

अगर तेरी नज़र है कातिल, तो शिकार हम होंगे,
अगर तेरा बदन है संगमरमर, तो खरीदार हम होंगे,
अगर तू है कोई शहज़ादी, तो पहरेदार हम होंगे,
अगर तेरी मोहब्बत मे है धोखा,तो तेरा प्यार हम होंगे.

Friday, October 18, 2013

भजन-ओ कान्हा रे.




 ओ कान्हा रे, मन तुझे ही पुकारे,

 ओ कान्हा रे, मन तुझे ही पुकारे,


 कोई नही है अपना मेरा, कोई नही पराया,

 कोई नही है सपना मेरा, कोई नही है साया.


 चाहे गम हो या खुशी हो, तुझको अपना माना,

 अब तो बस है तेरे ही, चरणो मे मेरा मेरा ठिकाना.


 ओ कान्हा रे, मन तुझे ही पुकारे,

 ओ कान्हा रे, मन तुझे ही पुकारे,


सेवक मैं हूँ स्वामी तू है,यही है अपनी कहानी,

दर्शन जो गर तेरे हो जाए,मिल जाए प्यासे को पानी.


भक्ति तेरी, शक्ति तेरी, यही है सच्ची आस,

मिलेगी मुक्ति सभी दुखों से, यही है मेरा विश्‍वास.


ओ कान्हा रे, मन तुझे ही पुकारे,

ओ कान्हा रे, मन तुझे ही पुकारे.

©नीतिश तिवारी।


अगर आपको ये भजन पसंद आई हो तो फ़ेसबुक पर शेर करना ना भूलें 


धन्यवाद.



Thursday, October 17, 2013

बिछोह।



















ये कैसा प्रेम है,
जिसे है बिछोह की तलाश.
आख़िर आज ये कैसा क्षण है,
जिसमे रूह को रूह से,
अलग होने का हो रहा आभास.

कुछ विस्मृत यादें,

कुछ अधूरे एहसास,
चंद खुशी के पल,
समेटे हुए है प्रेम.

नज़रों के साथ नज़राने,

यादों के साथ तराने,
कभी रूठने के,
तो कभी मनाने के बहाने.

दूर जाती वो किरण,

आसमान से छटते  वो बादल,
सर्द हवा का झोंका,
ये सब मैने देखा.

द्वंद है ये प्रेम की,

खुद से ही बिछड़ने की,
खुद से ही अलग होकर,
खुद मे ही सिमटने की.

©नीतिश तिवारी।





Sunday, October 13, 2013

जीवन- एक रहस्य


                               ये जीवन एक रहस्य है,
                               जिसमे नया रोमांच है,
                               नये संवाद हैं, नये विवाद हैं.
                              कहीं प्रेम है, कहीं छल है,

                              कहीं रोशनी है तो कहीं अंधियारा है,
                              नयी सोच है, नयी उमंग है,
                              कभी कांटों भरी मंज़िल है,
                              कभी फूलों की सेज़ है.
                              पर इन सबसे परे,
                              सत्य यही है,
                              ये जीवन एक रहस्य है.

Friday, October 11, 2013

Direct Dil Se..



                     गरजते हुए बादल से है धरती को एक आस,
                     कि कब जाकर बुझेगी एक दिन मेरी प्यास,
                     हर किसी के लिए वो लम्हा बन जाता है ख़ास,
                     जब प्यार से कोई गले लगता है आकर पास,
                     यही तो है आख़िर जीवन का सच्चा विश्वास,
                     जब कोई हमसफ़र हो हर पल साथ साथ.

                      छूटी दिल की लगी बिछड़ा मेरा यार,
                      उम्मीद के दामन से दूर हुआ मेरा प्यार,
                      ना जाने क्या खता थी किया उसने इनकार,
                      फ़ना हो जाते प्यार में अगर वो कर देते इज़हार.

                      उसकी खामोशी ने इज़हार ना करने दिया,
                     और लोग हमें आज भी बेवफा समझते हैं.

                      इनकार करते या इज़हार करते,
                      ना जाने हम तुमसे कैसे प्यार करते,
                      चाँद को देखते या सितारों की बात करते,
                      ना जाने हम कैसे कैसे ख्वाब देखते.

                      आँखे मिलाके पलकें झुकना इश्क है,
                      राह चलते चलते पीछे मुड़ जाना इश्क है,
                      यूँ तो है ज़िंदगी का हर नगमा इश्क मगर,
                      किसी के आँसू को होठों से लगाना इश्क है.

                      मैं कोई राह चलता राहगीर नही,
                      जो सिर्फ़ मंज़िल की तलाश में रहूँगा,
                      मैं तो आसमान का वो तारा हूँ,
                      जो हर सफ़र में मौजों के साथ रहूँगा.

                       जनाब शायरी कम कीजिए,
                       आजकल मोहब्बत नही हो रही है,
                       अब इस नफ़रत को रहने  दीजिए,
                        दुकान हमारी नही चल रही है.

I WANT TO FALL IN LOVE WITH YOU AGAIN.......


Oh my darling how you feel in rain,
I want to fall in love with you again.

As you walk, as you talk,
As you dance, as you do romance,
As you feel me,as you heal me,
As you care me,as you stare me.

I want that again,
I want that again.

I want to fall in love with you again,
I want to fall in love with you again.