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Showing posts from July, 2013

...कुछ तो लोग कहेंगे

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                                             अरे कभी तो ज़िक्र हो उस ज़ालिम बेवफा का ,                       लोग मुझसे मेरी मोहब्बत की दास्तान पूछते हैं.                       कुछ धड़कन का कसूर था, कुछ उनकी अदाओं का,                       और लोग कहते हैं की मैं मोहब्बत में बीमार हो गया.

Development of india has been stopped so has my life...

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जी हाँ, सही पढ़ा आपने. भारत का विकास रुक गया है इसलिए मेरी भी ज़िंदगी थम सी गयी है.अगले साल मेरठ मे रहते हुए मुझे दस साल हो जाएँगे और कॉंग्रेस की केंद्र सरकार को भी सत्ता में आए हुए.(अब भी आपकी शक है क्या कि मुलायम सिंह यादव और मायावती समर्थन वापस ले लेंगे और सरकार गिर जाएगी,अरे ये तो ऐसे नेता हैं जिनका कॉंग्रेस के साथ आकर्षण बल का प्रभाव चुंबक से भी ज़्यादा है.) मुझे आज भी याद  है की मई 2004 मे सरकार का गठन हुआ था और जून में मैं मेरठ आया था.मुझे भी उम्मीद थी अपनी ज़िंदगी से की नये जगह पर भी ज़िंदगी अच्छी तरह से चलती रहेगी,ठीक उसी प्रकार जैसे नये सरकार से लोगों को उम्मीद थी.लेकिन हम अगर इक्के दुक्के बदलाव को छोड़ दें तो ना ही देश मे और ना ही मेरी ज़िंदगी मे बड़ा बदलाव आया है.ऐसा लग रहा है मानो सबकुछ भगवान भरोसे चल रहा है. लेकिन एक फ़र्क है, मैं तो कम से कम सार्वजनिक मंच पर अपने विचार वयक़्त करता तो हूँ, पर अफ़सोस हमारे मनमोहन जी ने पिछले 9 सालो मे कितनी बार अपने विचार वयक़्त किए हैं वो हम सब जानते हैं. अब बताइए सरकार ने इतनी महंगाई बड़ा दी है कि अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के ब

मैं और वो

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                       एक चाँदनी रात की बात थी,                        जब  वो  मेरे साथ  थी,                       ज़ुल्फो को उसकी सँवारता रहा,                       अपनी चाँद को मैं निहारता रहा,                       ख्वाबो में उसके उतरने को था,                       जादू से उसके बहकने को था.                       रातों की नींद उड़ने लगी थी,                       दिन का चैन खोने लगा था.                       सांसो की मुझको फ़िक्र ही नही थी,                       मुझमे बसी थी धड़कन जो उसकी.                      आशियाने की चाहत नही थी मुझको,                      आँचल जो उसका मेरा साथ अब था.                      धड़कने लगा था मेरा दिल जब से,                      तड़पने लगी थी वो भी तब से,                      कशिश जो उसकी आँखो में थी,                     दीवाना बनाती  है अब भी वो मुझको,

first crush-is this love...?

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people says that it is not possible for anyone to forget their first crush.This is absolutely true at least in my case.I still remember the day when i saw her for first time.The girl in the pink dress with enchanting eyes and open hair.Her attracting smile touched my soul.And every time she smiled it seemed that she is smiling only for me.I always wanted to see her,feel her.There was a special kind of feeling which was attracting me towards her.The way she talked,the way she walked,the way she dance,i used to love the every moment of her.Her sincerity,her intelligence and her mesmerising beauty will always be remember in my life as most memorable moments. Recently i met her after long time....and ...feeling...can't be described in words.. I don't know love is blind or not but she makes me completely blind with her love.

happy birthday himanshu

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The above pictures is of my younger brother Himanshu.  He turns 13 today.Unfortunetly i am not with him this year to celebrate his birthday but i wish him many many happy returns of the day and wish him great luck for his future.God bless you Himanshu.

तेरा ख़याल

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                     कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी मोहब्बत का,                     अगर नही तो मेरे नाम का एक दिया ही जला दे.                      कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी आदत का,                     अगर नही तो अपने चेहरे से परदा ही हटा दे.                    कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी शोहरत का,                    अगर नही तो दुनिया को हमारे फसाने ही सुना दे,                    कुछ तो ख़याल होगा तुझे मेरी तड़प का,                   अगर नही तो फिर से मुझे अपना ही बना ले,                                     नीतीश

एक एहसास

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कल्पना से परे है तेरा प्यार, जिसमे तेरा ही नशा है मेरे यार, खूबसूरत वादियों में घूमते हुए पंछी की तरह, चलो बसाते  हैं अपना घर संसार. जिसमे तुम्हारा साथ हो, तुम्हारा एहसास हो, प्यार की गीत हो,  नये-नये प्रीत हो, एक कोरी किताब हो, जिसमे लिखेंगे अपनी दास्तान, ज़माने के लिए नही, अपनी यादों को ज़िंदा रखने के लिए, अपनी ख्वाबों को हक़ीकत बनाने के लिए, और ज़िंदगी को जन्नत मे गुज़ारने के लिए. नीतीश

उफ़ ये शायरी ....और वो.

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                           अब आ गये हो तो थोड़ी देर ठहर ही जाओ,                    ये दिल तुम्हारा ही है,गैरों का बसेरा नही.                    तू लौट आई है, मेरी दुआ कबूल हुई,                    पर अफ़सोस,                   तू फिर चली जाएगी, उसकी दुआ के खातिर.

संवेदना

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प्रस्तुत कविता समर्पित है उन सभी लोगो को जो किसी ना किसी रूप में उत्तराखंड की त्रासदी में प्रभावित हुए हैं और जिन्होने अपनी जिंदगी खो दी. ये कविता सही मायने मे एक श्रधांजलि है और इसे ज़रूर शेयर करें. पल भर का क्षण, और सब कुछ तबाह हो गया, ऐसी माया थी कुदरत की, कि मनुष्य लाचार हो गया. ना जाने कितने मर गये, ना जाने कितने लापता हैं, क्षत् विक्षत् लाशें बिखरीं हैं पहचान की तलाश में, पर शायद ये मुमकिन ना हो. लोग भटक रहे हैं, अपनो की तलाश में, पर उनका दर्द, कौन समझता है? शायद सिर्फ़ वो, जिन्होने खोया है , अपनो को, जिन्हे वो चाहते थे, जान से भी ज़्यादा, अपने आप से भी ज़्यादा. पर इस भयावह त्रासदी का ज़िम्मेदार कौन? मनुष्य या प्रकृति? जवाब सबके  पास है,  पर क्या फ़र्क पड़ेगा,  उस बेटे को जिससे दूर हो गयी उसकी माँ, उस बेटी को जिसके सर पिता का साया छिन गया. उस सुहागिन को जो पल भर में विधवा हो गयी. ये कैसी विडंबना है, इस दुख की घड़ी में भी, हुक्कमरानो को कुछ फ़िक्र ऩही. लोगों की ,देश की, उन्हे फ़िक्र है तो सिर्फ़ राजनीति की, मूवावाजे के मरहम की, ज़ख़्मों