चिराग जलाने जा रहे हो,
हवा को भी ले जा रहे हो।

बिखरकर टूट चुके हो तुम
फिर भी मुस्कुरा रहे हो।

इश्क़ में इतने पागल हो तुम,
दिन में चाँद को बुला रहे हो ।

तूफानों से तो डर लगता था,
दरिया में नाव चला रहे हो।

इश्क़ को मुकम्मल नहीं होना,
फिर भी उसे आजमा रहे हो।

©नीतिश तिवारी।