ऐसे लोग मजदूर कहलाते हैं।

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वो मेहनत करते हैं,
वो मजदूरी भी करते हैं,
दो वक्त की रोटी खातिर
जाने कितने पत्थर तोड़ते हैं।

मौसम कोई भी हो,
वो कभी नहीं थकते हैं,
हर परिस्थिति से वो,
जमकर लड़ते हैं,

अपना घर चलाने को,
दूसरों के घर बनाते हैं,
कोई शिकायत नहीं करते,
दिहाड़ी लेकर चले जाते हैं।

भविष्य के लिए नहीं जीते,
वर्तमान को सुंदर बनाते हैं,
सुबह से शाम मेहनत करते,
ऐसे लोग मजदूर कहलाते हैं।

©नीतिश तिवारी।

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Comments

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 15 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

      Delete
  2. बहुत सुन्दर।
    दूसरों के ब्लॉग पर भी अपनी टिप्पणी दिया करो।

    ReplyDelete
  3. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (17 -3-2020 ) को मन,मानव और मानवता (चर्चा अंक 3643) पर भी होगी,
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    ---
    कामिनी सिन्हा

    ReplyDelete
    Replies
    1. रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

      Delete
  4. Aise log mjdoor to khlate hai Lekin bhagyoday bhi karte hain. Sundar rachna

    ReplyDelete

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