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Showing posts from August, 2019

Main raat kaise guzarun.

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Pic credit : Pinterest. मैं बदन को सवारूँ या अपने नसीब को सवारूँ, तुझे दिल में बसा लूँ या अपने दिल से उतारूँ, ख़्वाबों की ताबीर ऐसी हुई कि नींद टूटी चुकी है, तू ही बता ओ ज़ालिम अब ये रात मैं कैसे गुजारूँ। Main badan ko sanwarun ya apne naseeb ko sanwarun, Tujhe dil mein basa lun ya apne dil se utarun, Khwabon ki tabeer aisi huyi ki neend tut chuki hai, Tu hi bata oo zalim ab ye raat main kaise guzarun. ©नीतिश तिवारी।

Hindi Shayari- Parwane huye hain

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Image source: Pinterest. दीवानों की बस्ती में मस्ताने हुए हैं हम, शम्मा के इंतजार में परवाने हुए हैं हम, यूँ तो यहाँ हर शख्स की मौजूदगी है, अपनों की महफ़िल में बेगाने हुए हैं हम। Deewanon ki basti mein mastane huye hain hum, Shamma ke intzaar mein parwane huye hain hum, Yun to yahan har shaks ki maujoodagi hai, Apnon ki mahfil mein begane huye hain hum. ©नीतिश तिवारी।

तू राधा मेरी, मैं तेरा कान्हा।

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Pic credit : Pinterest. आज कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर एक कविता  तू मेरे लिए 16108 रानियों के बराबर है, और मेरा दिल तुझे राधा की भाँति अपनाता है, तू मेरे लिय इतना खास है,  जैसे सावन का पहला एहसास है। जो मेरे सीने में धड़क रही है, उसकी तू कमजोरी है,  मैं द्वापर का कृष्ण तो नहीं मगर, फिर भी अपनी कहानी अभी तक अधूरी है। मेरी तरफ से तो बातें पूरी है, पर तेरी भी कुछ मजबूरी है, तेरी बस एक मुस्कान ने फेरी दुनिया मेरी है। तू राधा रुक्मिणी जिस भी रूप में, आजा तुझे स्वीकारने में, ये दिल करता नहीं देरी है, तू मेरी तरफ से पूरी की पूरी मेरी है। मेरी धड़कनो पर राज तेरा ही है, फिर किस बात की देरी है, तू ही मेरी दुनिया है या, तुझसे मेरी दुनिया है, इसी द्वंद में फसी कहानी मेरी है। ©शांडिल्य मनिष तिवारी।

ऐ दोस्त...

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Pic credit: Pinterest. ऐ दोस्त काश तुम गद्दार न होते  तो मेरे दिल के तार तार न होते  काश तुमने दोस्ती निभाना सीखा होता  तो मैं भी खुशी के दो पल जिया होता  काश तुमने मेरे भरोसे का लाज रखा होता  मेरे दिल से की गयी बातों का अपने दिमाग द्वारा उपयोग न किया होता  काश तुमने अपना दोहरा चरित्र  पहले ही दिखा दिया होता  तो मैं भी चैन से सोया होता काश तुमने कृष्ण-सुदामा परम्परा को कायम रखा होता तो आज भी मैं तुम पर अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहा होता  जो बातें तुझे रास न आईं मुझे एक बार बता कर तो देखा होता  ऐ दोस्त ... © शांडिल्य मनीष तिवारी।

चाँद को बुला रहे हो!

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चिराग जलाने जा रहे हो, हवा को भी ले जा रहे हो। बिखरकर टूट चुके हो तुम फिर भी मुस्कुरा रहे हो। इश्क़ में इतने पागल हो तुम, दिन में चाँद को बुला रहे हो । तूफानों से तो डर लगता था, दरिया में नाव चला रहे हो। इश्क़ को मुकम्मल नहीं होना, फिर भी उसे आजमा रहे हो। ©नीतिश तिवारी।

English poem - Questions and Answers.

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Pic credit: Google. One question has may answers You want your answer He wants his answer I want my answer That's the problem We couldn't find exact answer I wonder why this happens  People want happiness But only their happiness Never bother for others Problem lies in this  And we couldn't find happiness Life is easy But people make it complicated Then they complain I wonder why Why this happens People want answers But couldn't find answers ©Nitish Tiwary.

तुझे लगता है..

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Pic credit: Pinterest. तुझे लगता है... तुझे लगता है कि  मैं तेरे बगैर नहीं रह सकता तो  भ्रम में हो तुम तन्हाई की दीवार जो तूने खड़ी की है उसमें एक खिड़की  बना ली है मैंने तुम्हारे दर्द को भुलाने के लिए किताबों से मोहब्बत कर  बैठा हूँ नए कहानियों के साथ समय बिताता हूँ तुमसे अच्छे  किरदार हैं इनमें जो दर्द नहीं खुशियां देते हैं। ©नीतिश तिवारी।

Happy Independence Day India.

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Happy Independence Day. वीर शहीदों के बलिदान से आज़ादी हमने पायी है, कुछ बैठे रहे घरों में कुछ ने सरहद पर जान गँवायी है, अपने लहू से सींचकर  देश को आज़ादी दिलायी है, वतन के आगे नतमस्तक होकर विजय हमने पायी है। ©नीतिश तिवारी।

कविता- ज़िंदगी का फलसफा।

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Pic credit : Pinterest. कोई मुश्किल में जीता है, कोई आसान समझता है। ये जिंदगी का फलसफा है, ये हर कोई समझता है। फूलों और काँटों की जंग है, अंदर ही अंदर एक द्वन्द्व है। रोते नहीं हँसकर जीते हैं, तभी तो जिंदगी में उमंग है। ©नीतिश तिवारी। Twitter: @nitishpoet

कलयुग का आरम्भ क्यों हुआ?

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Pic credit : Google. कलयुग का आरम्भ क्यों हुआ? सनातन धर्म के शास्त्रों के मुताबिक कलयुग चौथा और आखिरी युग है। अभी कलयुग का प्रथम चरण चल रहा है। इसका मतलब ये हुआ कि अभी कई वर्षों तक कलयुग का काल क्रम जारी रहेगा और आखिरी में दुनिया खत्म हो जाएगी। वैसे दुनिया तो 2012 में ही खत्म होने वाली थी लेकिन यहाँ मौजूद लोगों के अच्छे कर्म और गुणवान चरित्र को देखते हुए भगवान ने कुछ वर्षों का एक्सटेंशन दे दिया। या यूँ कहिए कि सशर्त पेरोल दे दिया कि बेटा ठीक से रहो नहीं तो सबको अपने पास बुला लेंगे।  लेकिन इस पोस्ट में मेरा मकसद आप सभी को कलयुग के निर्माण के पीछे के सत्य से रूबरू कराने का है। द्वापर युग के कालखंड की घटनाओं को आधार बनाकर भगवान ने कलयुग का निर्माण किया। मनुष्य को सबसे ज्यादा बुद्धिमान प्राणी का दर्जा दिया गया। वो बात अलग है कि यही मनुष्य समय समय पर अपनी बुद्धि खो देता है और फिर भगवान को ही दोष देने लगता है।  तो आइये कलयुग निर्माण के पीछे के रहस्य को जानते हैं और कुछ बिंदुओं पर विचार करते हैं। # कलयुग का निर्माण शायद इसलिए हुआ होगा क्योंकि जब तक time machine की खोज