Friday, 23 August 2019

तू राधा मेरी, मैं तेरा कान्हा।
























Pic credit : Pinterest.



आज कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर एक कविता 


तू मेरे लिए 16108 रानियों के बराबर है,
और मेरा दिल तुझे राधा की भाँति अपनाता है,
तू मेरे लिय इतना खास है, 
जैसे सावन का पहला एहसास है।

जो मेरे सीने में धड़क रही है,
उसकी तू कमजोरी है, 
मैं द्वापर का कृष्ण तो नहीं मगर,
फिर भी अपनी कहानी अभी तक अधूरी है।

मेरी तरफ से तो बातें पूरी है,
पर तेरी भी कुछ मजबूरी है,
तेरी बस एक मुस्कान ने
फेरी दुनिया मेरी है।

तू राधा रुक्मिणी जिस भी रूप में,
आजा तुझे स्वीकारने में,
ये दिल करता नहीं देरी है,
तू मेरी तरफ से पूरी की पूरी मेरी है।

मेरी धड़कनो पर राज तेरा ही है,
फिर किस बात की देरी है,
तू ही मेरी दुनिया है या,
तुझसे मेरी दुनिया है,
इसी द्वंद में फसी कहानी मेरी है।

©शांडिल्य मनिष तिवारी।

4 comments:

  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-08-2019) को "बंसी की झंकार" (चर्चा अंक- 3437) पर भी होगी।


    --

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….

    अनीता सैनी

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. वाह बहुत अद्भुत सा सृजन ।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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