Friday, 21 June 2019

इश्क़ का ठिकाना।













Pic credit: Pinterest.







फूलों की ख्वाहिश तुम्हें है, काँटों से बैर रखते हो,
अपनों की तुम्हें कद्र नहीं, साथ में गैर रखते हो।

Foolon ki khwahish tumhen hai, kaanton se bair rakhte ho,
Apnon ki tumhen kadr nahin, saath mein gair rakhte ho.

आजमा कर देख लेना या देखकर आजमाना,
इश्क़ कर रहे हो तुम जिसका कोई नहीं ठिकाना।

Aajma kar dekh lena ya dekhkar aajmana,
Ishq kar rahe ho tum jiska koi nahin thikana.

©नीतिश तिवारी।

6 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (22 -06-2019) को "बिकती नहीं तमीज" (चर्चा अंक- 3374) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है

    ….
    अनीता सैनी

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    1. मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. वाह..बढ़िया शेर।

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  3. जब इश्क हो ही गया तो ठिकाने की क्यों है परवा ...
    अच्छे शेर ...

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