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काश तुम बेवफ़ाई ना करती,
मजबूरियाँ ना गिनाती,
फिर हम एक दूजे के होते,
नदी किनारे सीप से मोती चुगते,
तन्हाई को मात देते,
ख्वाबों में हसीन सपने देखते,
एक दूसरे में समा जाते,
मोहब्बत के गीत गाते।
 उन लम्हों को मैं सहेज पाता,
जो तेरे संग बिताए थे,
उन गलियों में फिर से जा पाता,
जो हमारे मिलन की गवाह थी,
काश!


©नीतिश तिवारी।