नज़र नज़र में तेरा असर है,
बाकी सब तो बेअसर है ,
तुझे मैं देखूँ जिस गली में,
उसी गली में मेरा भी घर है। 

सुरूर तो मोहब्बत का था ,
कसूर तो शरारत का था ,
फिर भी अंजाम तक ना पहुँच पाया ,
क्योंकि बेक़सूर मैं अपनी हरकत से था। 

©नीतीश तिवारी।