उसे मुझे खोकर क्या हासिल हुआ, कश्ती से दूर बस साहिल हुआ, मैं तो पेड़ की छाँव में बैठा हूँ, उसका ही धूप में जाना मुश्किल हुआ। Use mujhe khokar kya h…
Read moreमैं अब मेरी तकलीफ़ का तमाशा नहीं करता, मैं अब किसी से मरहम की आशा नहीं करता। वो जो अगर इतना खुद्दार था तो वफ़ा निभाता, मुझे इश्क़ के लिए भूखा-प्यासा नही…
Read moreमुझको उसी जगह दोबारा जाना था, जहाँ से हम दोनों का रिश्ता पुराना था, मैं अपनी कब्र पर फूल खुद चढ़ा आया हूँ, चर्चा ये है कि कौन ऐसा आशिक़ दीवाना था। Mu…
Read moreउसी दायरे में सिमट गई मेरी कहानी थी, मेरे किरदार पर जुल्म और जख्म की निशानी थी, कभी सोचता हूँ तो सिहर जाता हूँ, बिखर जाता हूँ, अब आप जान लो कि कैसी…
Read moreमेरे दर्द को यूँ बेवजह नीलाम मत करो, उसकी बेवफाई को अब सरेआम मत करो, इश्क़ में अक्सर हो जाती हैं नादानियाँ, पर उसकी साज़िश को बदनाम मत करो। Mere dard …
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