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सूरज फिर पश्चिम से निकलेगा।









 सूरज उस दिन पश्चिम से निकल गया था। ये एक ऐतिहासिक घटना थी। ठीक वैसे ही जैसे तुमने उस साँझ मेरे बदले मेरे रक़ीब को चुन लिया था। कुछ इतिहास बनाने में मैं भी यकीन रखता हूँ। साँझ को तुम गयी थी और उसी रात मैंने तुम्हारी यादों का क़त्ल कर दिया था। तुम्हारी याद बहुत जिद्द कर रही थी। मेरी मोहब्बत का सबूत माँग रही थी। इसलिए मैंने उसको रुख़सत कर दिया। 

पर तुम अपने नए यार के साथ सलामत रहना। उसका ख्याल रखना। उससे बेपनाह मोहब्बत करना। नहीं तो सूरज फिर से पश्चिम से निकल जाएगा।

©नीतिश तिवारी।

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