पहली बार से ज्यादा चाहूंगा मैं तुम्हें दूसरी बार, बस तीसरी बार मिलने की तुम हिमाकत ना करना। आग को बुझाना मुमकिन है धुएँ को नहीं, मैंने लाख कोशिशें की…
Read moreउसे मुझे खोकर क्या हासिल हुआ, कश्ती से दूर बस साहिल हुआ, मैं तो पेड़ की छाँव में बैठा हूँ, उसका ही धूप में जाना मुश्किल हुआ। Use mujhe khokar kya h…
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