35 का हो गया हूँ। घर का बड़ा लड़का हूँ। जितनी बड़ी जिम्मेदारी  है, उतने ही बड़े सपने हैं। मुझे पता भी है कि एक दिन मेरे सपने पूरे भी होंगे। फिर भी ना जाने दिल क्यों बेचैन रहता है? अंदर बहुत कुछ चलता रहता है। झूठी मुस्कान लिए खुश रहने की कोशिश करता रहता हूँ। 

शायद यही ज़िन्दगी है। मुझे और इंतजार करना होगा।
वैसे भी कहा गया है कि समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता। देखते हैं क्या होता है।
आप सहयोग बनाए रखिए।

आपका अपना।
नीतिश।