दो लम्हा प्यार का,
एक पल इंतज़ार का,
थोड़ी बेकरारी इकरार का,
मौसम है ये बहार का।

साथी मेरे पास तो आओ,
मेरे जिया को भी धड़काओ,
तुम मुझे अपना बनाओ,
सूखी बगिया को महकाओ।

मिलन की हसरत अधूरी है,
आज तो मिलना जरूरी है,
कहने का मौक़ा मत दो कि,
हमारे दरमियाँ कोई दूरी है।

रास्ते बदल गए थे तो क्या,
मंज़िल तो बस मोहब्बत है,
साथ में वक़्त गुजारने की,
चाहत है, जरूरत है।

©नीतिश तिवारी।