hindi love poem
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मैं लिख दूँगा
अपनी आँखों से
गिरते हुए आँसुओं
की धार के
बहने का प्रवाह।

मैं लिख दूँगा
बिस्तर में पड़ी
हुई सिलवटों को
सीधी करने में
गुजरी रात स्याह।

तुम अपने मस्करा
लगे खूबसूरत आँखों
को जरा तकलीफ़ देना 
पढ़ने को मेरी 
दास्तान-ए-हिज़्र।

मैं लिख दूँगा
अपने को सम्पूर्ण
संसाधनों से परिपूर्ण
व्यक्तित्व होने के
बावजूद तुमसे कभी
ना मिल पाने वाली
प्रेम करने की चाह।

©नीतिश तिवारी।