Sunday, 8 September 2019

इश्क़ में बदनामी।


pic credit: Google.






अभी परिंदों को मत उड़ाओ,
इन्हें तो बस गुलामी पसंद है,
वो इश्क़ करने से नहीं डरता,
उसे तो बस बदनामी पसंद है।

Abhi parindon ko mat udao,
Inhen to pas gulami pasand hai,
Wo ishq karne se nahin darta,
Use to bas badnaami pasand hai.

मैं हैरान हूँ, मैं परेशान हूँ और मैं हूँ खफा,
तुम पास आ जाओ, मेरे दर्द की मिलेगी दवा,

Main hairaan hoon, main pareshan hoon aur main hoon khafa,
Tum paas aa jao, mere dard ki milegi dawa.


©नीतिश तिवारी।

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (09-09-2019) को    "सोच अरे नादान"    (चर्चा अंक- 3453)   पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति

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