Bhagat singh


























शहीदों के बलिदानों का कर्ज हम कैसे चुकाएंगे,
क्या नए हिन्दुस्तान में हम अपना योगदान दे पाएंगे।

वीर सपूतों ने दिलवाई हमें नयी आज़ादी थी,
उनकी वीरता के बदौलत अंग्रेजों की शामत आयी थी।

कितने कष्ट सहे उन्होंने कितनी गोली खाई थी,
भारत माता की खातिर  जान बाज़ी पर लगाई थी।

नमन उन वीर सपूतों को जो हमारे खातिर शहीद हुए,
आज़ाद भारत के लिए फाँसी के तख्ते पर झूल गए।

©नीतिश तिवारी।

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