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Showing posts from September, 2016

तेरी तस्वीर से।

मेरी चाँद को घेर लिया फलक के सितारों ने, मेरी नींद को तोड़ दिया जुल्फ के बहारों ने, कभी नवाज़िश महबूब की तो कभी इबादत खुदा की, मेरी ज़ीस्त को रोक दिया हालात के दीवारों ने। वाकिफ तो था मैं इस दुनिया की दस्तूर से, वफ़ा की उम्मीद कर बैठे हम एक मगरूर से, ऐसा क्या हुआ जो एक पल में ठुकरा कर चली गयी, बस पूछता रहता हूँ मैं तेरी तस्वीर से। ©नीतिश तिवारी ।

इतिहास बनाने को तैयार बैठे हैं।

सुन ले बेटा पाकिस्तान, बाप है तेरा हिन्दुस्तान। मत भूल अपनी औकात वरना, बन जायेगा तू कब्रिस्तान। खैरात की दौलत को तूने अपना मान रखा है, नेहरू गांधी के एहसानों को भुलाकर बैठा है। कश्मीर का राग अलापने को आतंकवादी पाल रखा है, हाफ़िज़ सईद को तूने दामाद बना कर रखा है। तुझे मासूमों की चीख सुनाई नहीं देती, अपने ही घर में हमलों की गूंज सुनाई नहीं देती। खुद गड्डा खोदकर अपनों को कर रहा कुर्बान है, अपने लिए बना रहा एक नया कब्रिस्तान है। तेरा भूगोल बदलने को हम तैयार बैठे हैं, तेरी औकात बताने को लाख़ों पहरेदार बैठे हैं। अगर भूल गया तू पिछले जंग के परिणाम को तो, फिर से इतिहास बनाने को हम तैयार बैठे हैं। ©नीतिश तिवारी। जय भारत। जय हिन्द।

प्यार का करंट-बिजली के नाम बिरजू का लेटर।

माई डियर       बिजली। आशा है कि तुम पहले की तरह सबकी जिंदगी में प्यार का करंट दौड़ा रही होगी। आज तुम्हारी शादी की पहली सालगिरह है और हमारे बिछड़ने का भी। समझ नहीं आ रहा है कि मैं तुम्हे ये खत्त क्यों लिख रहा हूँ। तुम्हें मुबारकबाद देने के लिए या अपने आप को सजा देने के लिए। हमें बिछड़े हुए एक साल हो गए लेकिन तुम्हारे प्यार में मिले हुए झटके से अभी तक उबर नहीं पाया हूँ। याद है बिजली, कॉलेज का वो पहला दिन जब हम मिले थे। तुम गुलाबी सलवार कमीज़ में एकदम पटाखा लग रही थी और मैं एक माचिस के तिल्ली जैसा पतला था। तूने अपनी आँखों में ढेर सारा काजल लगाया था कि किसी की नज़र ना लगे। लेकिन मेरे अंदर बारूद जो भरा था, सो हो गया विस्फोट। याद है बिजली, जब तुम रोज शाम को गाँव के पीछे वाली नहर पर मिलने आया करती थी। मैं तुझसे बार बार कहता था कि खुले बालों में आया कर और तुम मुझे चिढ़ाने के लिए चुटिया बनाकर आ जाती थी। रोज शाम को ढलते सूरज के साथ हमारा प्यार बढ़ता ही जा रहा था। फिर रात को मैं तेरी यादों को सिरहाने लेकर किसी तरह सो पाता था। याद है बिजली, जब कॉलेज के बाद बार बार तुम शर्मा

बेवफाई करके चली गयी वो...

रस्मों  रिवाजों की दुहाई देकर चली गयी वो, अपने जिस्म की परछाई छोड़कर चली गयी वो, बार-बार उसने कहा कि हालात के आगे मजबूर हूँ, इश्क़ में फिर से बेवफाई करके चली गयी वो। ©नीतिश तिवारी।

फिर से मोहब्बत का हिसाब।

एक आँधी आयी और जलता हुआ वो चिराग बुझ गया। लो फिर से आज मोहब्बत का हिसाब हो गया।। तेरी यादों के जलते धुएँ से कैसे अपने आप को संभालूं। आंसुओं का सहारा लूँ या समंदर को पास बुला लूँ। ©नीतिश तिवारी।

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