एक आँधी आयी और जलता हुआ वो चिराग बुझ गया।
लो फिर से आज मोहब्बत का हिसाब हो गया।।

तेरी यादों के जलते धुएँ से कैसे अपने आप को संभालूं।
आंसुओं का सहारा लूँ या समंदर को पास बुला लूँ।

©नीतिश तिवारी।