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Showing posts from July, 2016

जब से मिली हो तुम...

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ना करार है, ना इनकार है, जब से मिली हो तुम, बस प्यार ही प्यार है। अब भूले बिसरे गीत नहीं, उलझी हुई कोई प्रीत नहीं, जब से मिली हो तुम, तुझसे रौशन मेरा जग संसार है। कभी बगिया में खिली फूल सी, कभी रेत में उड़ती धूल सी, कभी आसमां में उड़ती पतंगों सी, कभी दिल में उठते तरंगों सी। गीत ना जाने कब ग़ज़ल बन गए, मेरे सारे ग़म ना जाने कब धूल गए, जब से मिली हो तुम, तेरे प्यार में हम अब संवर गए। ©नीतिश तिवारी।

नक़ाब पहने बैठे हैं।

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कल उसकी आँखों में अपनी तस्वीर नजर आयी। ज़ुल्म देखिए आज वो नक़ाब पहने बैठे हैं।। फिर जिंदगी की एक नई शुरुआत होने को है, सूखे बंजर में बरसात होने को है,  तड़पता रहा उम्र भर जिस शख्स के खातिर, उस शख्स से आज मुलाकात होने को है। ख्वाहिशें अगर तुमसे हैं जिंदा तो चल साथ मेरे, तेरे हर धड़कन की इबादत अब मैं करूँगा, रंजिशें हैं जमाने में अगर हमारी मोहब्बत के खातिर, तो मरते दम तक इस जमाने से मैं लड़ूंगा। ©नीतिश तिवारी।