Thursday, 28 January 2016

चलो तुम्हे लिख देता हूँ।




आज कुछ ख़याल नहीं आ रहे हैं ,
चलो तुम्हे लिख देता हूँ। 
तुम्हारी हँसी लिख देता हूँ ,
तुम्हारी ख़ुशी लिख देता हूँ। 

आज कुछ ख़याल नहीं आ रहे हैं ,
चलो तुम्हे लिख देता हूँ।
तुम्हारी गुस्ताखियाँ लिख देता हूँ ,
तुम्हारी बदमाशियां लिख देता हूँ ,

प्यारी सी कहानी लिख देता हूँ ,
तुम्हारी वो नादानी लिख देता हूँ ,
चेहरे का नजराना लिख देता हूँ ,
जुल्फों का सवाँरना लिख देता हूँ। 

आज कुछ ख़याल नहीं आ रहे हैं ,
चलो तुम्हे लिख देता हूँ।
तुझसे जुड़ा वो बंधन लिख देता हूँ ,
तेरे प्यार का पागलपन लिख देता हूँ। 

©नीतिश तिवारी।







15 comments:

  1. प्रेममय सुन्दर प्रस्तुति ।

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  2. बेहद भावपूर्ण प्रेमरस परिपूर्ण रचना......बधाई....

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  3. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (29.01.2016) को "धूप अब खिलने लगी है" (चर्चा अंक-2236)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  4. बहुत सुंदर पंक्तिया ।

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  5. आज सारी रात ओस की बुँदे गिरी
    चलो तुम्हारे साथ हर मुलाकात आज लिख देता हूँ ...बहुत अच्छी कविता है थोड़ी गुंजाईश है जल्दी पूरी हो जायेगी

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  6. उनको लिखा भी किसी कविता से कम कहाँ ... बहुत लाजवाब ...

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