Tuesday, 16 April 2019

Rap Song: Ek Baat Bolta hoon.











चल तेरे को मैं एक बात बोलता हूँ,
इन दुनिया वालों की मैं जात बोलता हूँ,
जितना ही तू उठेगा उतना ही ये गिराएंगे,
आज सबके सामने इनकी ये औकात बोलता हूँ।

ना रुकना है ना झुकना है बस चलते रहना है,
नदी के पानी के साथ तुझे बहते रहना है,
मंज़िल तुझे दूर दिखे फिर भी ना घबराना है,
काला अक्षर भैंस बराबर अब नहीं कहलाना है।

दुनिया की फिक्र करेगा तो करता ही रह जाएगा,
पानी से डरेगा तो तैरना कैसे आएगा,
आँसूओं की घूँट को जूस बनाकर पी जा तू,
आँसूओं की ताकत तू तब समझ पाएगा।

चल तेरे को मैं एक बात बोलता हूँ,
आज अपनी ज़िंदगी के मैं राज़ खोलता हूँ,
चाहे कुछ भी बन जाये ज़मीन से जुड़े रहना,
ये लाख पते की बात है तुझे मैं फ्री में बोलता हूँ।

©नीतिश तिवारी।



Saturday, 13 April 2019

मुझे आज़ाद कर दो।
















Pic credit : Google.








जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से
आकर मुझे आज आज़ाद कर दो 
भटकता हूँ बंजारे की तरह
एक शहर से दूसरे शहर
सुलझा के मेरी पहेली खत्म ये फसाद कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज आजाद कर दो 

बढ़ ना पाया तेरी बातों से आगे
निकल ना पाया तेरी वादों से आगे
कोशिश जब भी कि मैंने खुद पर फ़तह पाने की
बड़ी मुश्किल कर जाते तेरे बांधे धागे
इन धागों को आ खुद तोड़, मेरा नया आगाज कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज आज़ाद कर दो 

शायद तुझे फिक्र नहीं है मेरी
पर पागल की तरह करता रहता हूँ
हर समय हर वक्त जिक्र तेरा
मुकम्मल गीत सी थी तुम 
मै था अधूरा सरगम तेरा
फिर से रख के दामन पे हाथ मेरे
पूरा तुम मेरा हर साज कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज आज़ाद कर दो 

मुस्कुराहट पर तेरी मरता था मैं
हो ना जाए तू मुझसे दूर 
इसी बात से डरता था मैं
अब ना वो तेरी मुस्कुराहट रही 
ना ही मेरा डर रहा
और ना ही मेरी मंजिल रही
और ना ही अब मेरा घर रहा
कुछ यादें हैं जिन्हें लिए फिर रहा हूँ मैं
जानता हूँ तुम बेरहम हो
उसी बेरहमी से खत्म उन यादों को आज कर दो
जकड़ा हूँ तेरी यादों की जंजीरों से 
आकर मुझे आज़ाद कर दो 

©राजकुमार रॉय।

Friday, 12 April 2019

Gazal: Heer Ranjha Aur Ishq.













Pic credit : Google.







खुद को मिटाते रहे उसके नाम के खातिर,
खुद को झुकाया हमने उसके एहतराम के खातिर।

सुना था इश्क़ में हीर राँझा हो जाते हैं,
हमने भी इश्क़ कर लिया इस इनाम के खातिर।

ना मासूमियत की कद्र थी ना रिश्तों की परवाह उसे,
पूरी डाली उसने काट दी एक पके आम के खातिर।

नामुमकिन को मुमकिन करने का उसे बड़ा शौक था,
मुझको भी बर्बाद किया अपने इस अंज़ाम के खातिर।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 10 April 2019

Tum yaad aati ho.














Pic credit : Google.









तुम याद आती हो।

भोर की पहली किरण के साथ
कड़ी धूप की तपन के साथ
बादल से भरे गगन के साथ
रातों में ठंढी पवन के साथ
तुम याद आती हो।

तन्हाई के वीरानों के साथ
महफ़िल के तरानों के साथ
मेरे अनकहे फ़सानो के साथ
हर खूबसूरत नज़रानो के साथ
तुम याद आती हो।

मेरी बचकानी नादानी के साथ
नए दौर की कहानी के साथ
उस रूठी हुई कहानी के साथ
अपनी वो मनमानी के साथ
तुम याद आती हो।

मेरी हर इबादत के साथ
अपनी हर शिकायत के साथ
तेरी मोहब्बत की दावत के साथ
छोटी छोटी शरारत के साथ
तुम याद आती हो।

©नीतिश तिवारी।


Friday, 5 April 2019

नज़राना मोहब्बत का।













Pic credit: Google.







तेरे उड़ते हुए खयालों का मैं एक परिंदा हूँ,
छत पर निकल कर देख, मैं अभी ज़िंदा हूँ।

कोई नज़राना तो पेश कर, मैं अब आ गया हूँ,
धड़कनें तो जरा सुन, मैं तुझमें समा गया हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 3 April 2019

‌बदलते मौसम में प्यार के रंग।












Image courtesy : Google.







‌बदलते मौसम में प्यार के रंग।

‌गर्मी आ गयी है, पर ये मौसम मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता । शायद इसलिए क्योंकि गर्मी की शुरूआत बसंत ऋतु के बाद होती है। बसंत में पेड़ से पुराने पत्ते अलग हो जाते हैं। लेकिन तुम मुझसे अलग होकर फिर मुझमे समाने का नाम नहीं लेती हो। मौसम की तरह खुद को तुमने भी बदल दिया है। कौन से रिवाज़ का चलन शुरू करना चाहती हो। इतना इंतज़ार तो धरती को सूरज भी नहीं करवाता। मेघ की बूंदे धरती पर एक दिन बरस ही जाती हैं। लेकिन तुम्हें तो आँसू का शौक है ना। तो इस शौक को पूरा कर लेना। लेकिन एक बात जान लो, इस बार आँसू मेरे आँखों से भी निकलेंगे। दोनों की मजबूरी यही रहेगी कि आँसू पोछने के लिए एक दूसरे के पास नहीं रहेंगे। पर इसका जिम्मेदार तुम सिर्फ मुझे मत ठहराना। पूछना अपने दिल से कभी कि ये दीवाना तुम्हें कितना प्यार करता है। हाँ, आज भी करता हूँ उतनी ही मोहब्बत। आज भी।

ये भी पढ़िए : एक खयाल- सिर्फ तुम।

©नीतीश तिवारी।

Monday, 1 April 2019

नरेंद्र मोदी दुबारा प्रधानमंत्री बनते हैं तो 2019 के बाद देश में चुनाव नहीं होंगे!






















देश में  चुनावी महौल चल रहा है और हर बार की तरह इस बार भी नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है। कोई अपनी पुरानी विरासत बचाने के लिए जंग लड़ रहा है तो कोई अपनी सरकार के काम गिनाकर जनता से वोट माँग रहा है। और कुछ तो वही पुराना लॉलीपॉप  फिर से देने को कह रहे हैं।

पर इन सबके बीच सवाल ये है कि क्या ये देश में होने वाला आखिरी चुनाव है? क्या इसके बाद हिंदुस्तान में तानाशाही होगी? क्या लोकतंत्र का वजूद समाप्त हो जाएगा? क्या संविधान को बदल दिया जाएगा?

मुझे पूरा विश्वास है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में तानाशाही की कोई जगह नहीं है और होनी भी नहीं चाहिए। लेकिन हाल के दिनों में कुछ नेताओं द्वारा दिये गए बयान इस बहस को जन्म देते हैं।

नेताओं का कहना है कि नरेंद्र मोदी दुबारा प्रधानमंत्री बनेंगे तो 2019 के बाद देश में कोई चुनाव नहीं होगा। मतलब 2024 में फिर से प्रधानमंत्री के लिए चुनाव नहीं होगा और मोदी जी ही कई वर्षों तक राज करेंगे।
व्यक्तिगत तौर पर मैं कहूँ तो मोदी जी को बिल्कुल कई वर्षों तक प्रधानमंत्री बने रहना चाहिए मगर चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के बाद।

इस बहस को जन्म दिया सबसे पहले केजरीवाल ने। केजरीवाल के अनुसार मोदी सरकार का रवैया हिटलर की तरह है। अमित शाह और मोदी की जोड़ी को नहीं हटाया गया तो ये दोनों मिलकर संविधान को बदल देंगे। केजरीवाल बिना किसी तर्क के मोदी जी को हटाने की बात कर रहे हैं सिर्फ इसलिए कि मोदी जी इन्हें पसंद नहीं। इस हिसाब से तो खुद केजरीवाल की मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में है, क्योंकि दिल्ली के लाखों लोगों को ये भी पसंद नहीं हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए, देश के प्रधानमंत्री के बारे में इन्होंने कैसी कैसी भाषा का प्रयोग किया है, हम सभी भलीभांति परिचित हैं।

इसके बाद भाजपा के सबसे विवादित नेता साक्षी महाराज का बयान आया कि 2024 में चुनाव नहीं होंगे। लगता है कि नेताजी सांसद के साथ साथ ज्योतिषी भी हैं। साक्षी महाराज के बयानों का निष्कर्ष निकालें तो पूर्व में भी ये ऐसे ही विवादित बयान देते आये हैं। जिसका कोई तर्क नहीं होता। हर पार्टी में ऐसे नेताओं की कोई कमी नहीं है।

काँग्रेस पार्टी इसमें कहाँ पीछे रहने वाली थी। देश की सबसे पुरानी पार्टी के नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भी यही लगता है कि ये देश का आखिरी चुनाव है। इस बात को उन्होंने जोर देकर कहा और पूरे विश्वास के साथ कहा।

सवाल ये है कि आखिर इन नेताओं को क्यों लगता है कि ये आखिरी चुनाव है? सच तो ये है कि विपक्ष के नेता हताशा में ऐसा बयान दे रहे हैं और पक्ष के नेता अति आत्मविश्वास में। लेकिन जनता अब जागरूक हो चुकी है। किसी पार्टी के चाहने से उसकी सरकार नहीं बनने वाली है। जनता जल्द ही तय करेगी कि 2019 में किसकी सरकार होगी। लोकतंत्र और संविधान बने रहना चाहिए।

जय भारत। जय हिंद।

ये भी पढ़िए : मंदिर वहीं बनाएंगे। मोदी, योगी और राहुल की बातचीत में हुआ खुलासा।

©नीतिश तिवारी।

Friday, 29 March 2019

इंतज़ार और आचार संहिता।


















अगर शब्दों में पिरो दूँ तुम्हें तो मेरी अमृता हो तुम,
इज़हार कैसे करूँ, चुनावी आचार संहिता हो तुम।


इंतज़ार की घड़ी खत्म हुई अब ऐतबार होगा,
तू जमाने की परवाह मत कर, अब सिर्फ प्यार होगा।


©नीतिश तिवारी।

Thursday, 28 March 2019

एक खयाल.... सिर्फ तुम।













Image credit: Google.






एक खयाल.... सिर्फ तुम।

तेरी सुनहरी यादों में विचरण करते हुए एक एहसास होता है। हमने रेत पर किले बनाए थे वो ढह गए होंगे। कसूर तुम्हारा था, मेरा था या उस हवा के झोंके का, मालूम नहीं। पर रेत का वो किला बहुत सुंदर था, बिल्कुल तुम्हारी तरह। मोहपाश के बंधन में जकड़ा हुआ प्रेम आखिर कब तक चलता। उसे तो बिखरना ही था, सो बिखर गया। ऊपर से जमाने के ज़ुल्म-ओ-सितम ने हमारे ज़ख्म को और गहरा कर दिया। लेकिन इन ज़ख्मों पर मरहम लगाने को तेरी बातें हैं। मेरे कानों में अभी भी गूँजती हैं तुम्हारी जादुई बातें, वही जो तुमने हमसे कहा था। तुमने कहा था कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ और ताउम्र करती रहूँगी। पर शायद हमारे प्यार की उम्र ज्यादा लंबी ना थी। थोड़ी थी पर हसीन थी। तुमने मुझे जीने का मकसद दे दिया। अगर इसे धोखा कहूँगा तो हमारे प्यार की बेइज्जती होगी। रहने दो, फिर लिखूँगा कभी, और जज़्बात, अपने दिल के हालात। 

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 26 March 2019

काश तुम...













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काश तुम बेवफ़ाई ना करती,
मजबूरियाँ ना गिनाती,
फिर हम एक दूजे के होते,
नदी किनारे सीप से मोती चुगते,
तन्हाई को मात देते,
ख्वाबों में हसीन सपने देखते,
एक दूसरे में समा जाते,
मोहब्बत के गीत गाते।
 उन लम्हों को मैं सहेज पाता,
जो तेरे संग बिताए थे,
उन गलियों में फिर से जा पाता,
जो हमारे मिलन की गवाह थी,
काश!


©नीतिश तिवारी।