आख़िरी बार मैंने तुम्हें ध्यान से देखा था तब तुम अपने बागीचे में पौधों को पानी दे रही थी। कितना अजीब है ना! तुम्हें पौधों का खयाल तो था पर मेरा नहीं।
आज पाँच साल बाद न जाने तुम कहाँ रहती हो? मैं उसी शहर में अधिकारी बनकर आया हूँ। मुझे उस प्रॉपर्टी को हटाकर सड़क बनवाने की जिम्मेदारी मिली है। तुम मेरी पहली और आख़िरी मोहब्बत थी। मैं पौधों का खयाल रखूँगा और तुम्हारी यादों का भी।
©नीतिश तिवारी।

0 Comments
पोस्ट कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएँ और शेयर करें।