जवाब खोजने निकलोगे तो कई सवाल अधूरे रह जाएँगे। तुम किस लिए यहाँ भेजे गए हो इसका पता तुम्हें खुद एक दिन चल जाएगा। सब अपने समय से होता है। सबकी अपनी किस्मत होती है। राह में पत्थर आ जाते हैं तो फिर एक बारिश भी आती है जो उस पत्थर को बहा ले जाती है। फिर उस बारिश का रुख मोड़ने के लिए आंधी भी आ जाती है। और फिर अचानक से सब कुछ शांत हो जाता है बिल्कुल तालाब में जमे हुए पानी की तरह। मछलियों को भी तो उनका आश्रय चाहिए। कब तक इंसान खुद के लिए सब कुछ करके स्वार्थी बना रहेगा। समय का चक्र सभी प्राणियों के लिए समान है। मैं यह लिख रहा हूँ, आप यह पढ़ रहे हैं। आपको पसंद आया। यही जीवन है और इसी का हमें भोग करना है।
©नीतिश तिवारी।

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