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Main mar jata kyun nahi | मैं मर जाता क्यों नहीं।

Main mar jata kyun nahi

 







Main mar jata kyun nahi | मैं मर जाता क्यों नहीं।


वो अपने पास मुझे बिठाता क्यों नहीं,
अजीब दुख है ये जाता क्यों नहीं।

मजबूरियाँ बताया और एक लकीर खींच गया,
कोई बारिश उस लकीर को मिटाता क्यों नहीं।

मझधार में फंसी है मेरे मोहब्बत की नाव,
हैरान हूँ, कोई तूफान उसको डुबाता क्यों नहीं।

दो ही किरदार थे कहानी के एक मैं और एक वो,
वो अब नहीं है, तो मैं मर जाता क्यों नहीं।


Woh apne paas mujhe bithata kyun nahi,
Ajeeb dukh hai ye jata kyun nahi.

Majburiyan bataya aur ek lakeer kheench gaya,
Koi barish us lakeer ko mitata kyun nahi.

Majhdhar mein fansi hai mere mohabbat ki naav,
Hairaan hoon, koi toofan usko dubaata kyun nahi.

Do hi kirdar the kahani ke, ek main aur ek woh,
Woh ab nahi hai, toh main mar jata kyun nahin.


©नीतिश तिवारी।


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6 Comments

  1. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा 25.09.2021 को चर्चा मंच पर होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    ReplyDelete
    Replies
    1. रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

      Delete
  2. खूबसूरत रचना

    ReplyDelete
  3. बहुत ही मर्मस्पर्शी सृजन।
    सादर

    ReplyDelete

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