पहले इश्क़ का आख़िरी अंज़ाम।

Pahle ishq ka akhiri anzam





 












तुम चार दिन

के इश्क़ में ही

बेवफ़ा हो गए।


और एक हम जो

बरसों तक तुमसे

कभी खफ़ा ना हुए।


पहले इश्क़ का

आख़िरी अंज़ाम

शायद यही होना था।


Tum chaar din 

Ke ishq mein hi

Bewafa ho gaye.


Aur ek hum jo

Barson tak tumse

Kabhi khafa na huye.


Pahle ishq ka

Akhiri anzaam

Shayad yahi hona tha.

भ्रम ये कि 

तुम मेरे हो,

सत्य ये कि ये

सत्य नहीं है।


Bhram ye ki

Tum mere ho,

Satya ye ki ye

Satya nahi hai.


©नीतिश तिवारी।





Comments

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज रविवार 24 जनवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  2. बहुत सुन्दर।
    कभी दूसरों के ब्लॉग पर भी कमेंट किया करो।
    राष्ट्रीय बालिका दिवस की बधाई हो।

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    Replies
    1. धन्यवाद सर। आजकल थोड़ी व्यस्तता की वजह से नहीं आ पा रहा हूँ।

      Delete
    2. आपका धन्यवाद।

      Delete

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