Thursday, July 2, 2020

दर्द में लिखता हूँ ग़ज़ल।


Shayari gazal poetry story
Pic credit: pinterest.





स्याही को अपना बनाया,
शब्दों को हमराही,
तब जाकर निकली है,
अच्छी भली एक शायरी।

काव्य में उपजे भाव को,
सम्मान देता है रचयिता,
तब जाकर बनती है,
सुंदर सी एक कविता।

मोहब्बत में पड़ती है,
जब जब कोई खलल,
बना लेते हैं हम भी,
दर्द भरी एक ग़ज़ल।

सबके पास होता है,
कहने को कुछ जवानी में,
फिर किरदार उभरकर आते हैं,
उस शख्स की कहानी में।

©नीतिश तिवारी।

12 comments:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार
    (03-07-2020) को
    "चाहे आक-अकौआ कह दो,चाहे नाम मदार धरो" (चर्चा अंक-3751)
    पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है ।

    "मीना भारद्वाज"

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    1. रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. बहुत सुंदर ।
    मन के भाव जो सरलता से व्यक्त कर सके ,वही सच्चा कवि होता है।

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  3. बढ़िया नीतीश जी

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  4. बहुत खूब,सादर नमन

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  5. क्या बात है ,बहुत ही अच्छी रचना

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