Saturday, April 4, 2020

शायरी जो हर आशिक़ कहना चाहे।

Pic credit : twitter.






जंगल में सब कुछ हरा है, तेरी मोहब्बत ना जाने क्यों सूख गयी
उधर तुमने इश्क़ में उपवास रखा, इधर मेरी भी भूख गयी।

Jungle mein sab kuch hara hai, teri mohabbat na jane kyun sookh gayi,
Udhar tumne ishq mein upwas rakha,
Idhar meri bhi bhookh gayi.

साज़िश जमाने ने किया तो सजा भी मुक़र्रर हुई,
इश्क़ में इतने ज़ुल्म सहने का मुझे तज़ुर्बा ना था।

Sazish jamane ne kiya to saja bhi mukarrar huyi,
Ishq mein itne zulm sahne ka mujhe tazurba na tha.

©नीतिश तिवारी।

4 comments:

पोस्ट कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएँ और शेयर करें।