Saturday, April 11, 2020

मोहब्बत का कोई इनाम तक ना मिला।



Photo credit : Google.




करवटें लेता रहा तमाम रात, नींद का पैगाम तक ना मिला,
शराब पीने की हमने सोंची एक बार, मगर जाम तक ना मिला।
लैला-मजनूँ , हीर राँझा की तो मिसालें हुआ करती हैं,
और एक हमारी मोहब्बत का कोई इनाम तक ना मिला।

Karwaten leta raha tamaam raat, neend ka paigaam tak naa mila,
Sharab peene ki humne sonchi ek baar, magar jaam tak na mila,
Laila mahino heer ranjha ki to misalen hua karti hain,
Aur ek humari mohbbat ka koi inaam tak na mila.

©नीतिश तिवारी।


6 comments:

  1. बहुत-बहुत सुंदर सृजन। हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  2. मैंने, कतिपय कारणों से, अपना फेसबुक एकांउट डिलीट कर दिया है। अतः अब मेरी रचनाओं की सूचना, सिर्फ मेरे ब्लॉग
    purushottamjeevankalash.blogspot.com

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    1. ब्लॉग है तब तक कोई दिक्कत नहीं। फेसबुक तो दुबारा बन जायेगा।

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