Sunday, 6 October 2019

जी चाहता है।

Manzil shayari











ख्वाबों के दरिया
से होते हुए
दिल के समंदर में
पहुँचकर
गोता लगाने को
जी चाहता है
अब बहुत देर
हो गई है
अब मंज़िल तक
पहुँचने को
जी चाहता है।

©नीतिश तिवारी।

ये भी देखिए।


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