Saturday, 5 October 2019

तुम्हें पाना चाहता हूँ।

Tumhe pana chahta hu


























Pic credit : Pinterest.







भौतिक संसाधनों से परे,
नाम और शोहरत की 
भीड़ में भी मैं
सिर्फ तुम्हें तलाश
करता हूँ।

इस निरर्थक जीवन में
सिर्फ एक काम 
जो सार्थक लगता है
तुम्हें तलाश करना।

वही बातें वही रातें
चंद मुलाक़ातें
फिर से लाना चाहता हूँ
तुम्हें ढूँढना चाहता हूँ
तुम्हें पाना चाहता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

22 comments:

  1. अच्छा लगता है दुनियादारी से दूर सुनहरे पलों में जीना उन्हें दुहराना और खुश होना
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में रविवार 06 अक्टूबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  3. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (0६ -१०-२०१९ ) को "बेटी जैसा प्यार" (चर्चा अंक- ३४८०) पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

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  4. सुंदर अभिव्यक्ति

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  5. चाहतों के मेले हैं चारों तरफ क्या कीजे....
    सुंदर रचना
    नये ब्लोगर से मिलें- अश्विनी: परिचय (न्यू ब्लोगर) 

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  6. सुंदर अभिव्यक्ति

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  7. सुन्दर रचना

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  8. बहुत सुंदर रचना

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  9. बहुत सुंदर सृजन।
    उम्दा/बेहतरीन।

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