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Showing posts from January, 2017

मेरा वज़ूद।

मुझको मेरे वज़ूद का होना अब खलता है, पर ऐसे ही तो ज़िन्दगी का खेल चलता है। आज मौजूद नहीं है हीरे को तराशने वाला जौहरी, ये कौन सा दौर है जिसमें शीशा भी पिघलता है। लोग तो बहुत मिलते हैं सफर में हमसफर बनने वाले, पर मुश्किल हालात में कहाँ कोई साथ चलता है। ख्वाहिशों की बलि देकर ज़िन्दगी को संवारा है मैंने, पर मंज़िल पाने को अब भी ये दिल मचलता है। मैं किसे चाहूँ, किसके लिए अब सज़दा करूँ, ये वक़्त भी मतलबी हो गया, हर पल बस बदलता है। ©नीतिश तिवारी।

इश्क में गुनाह।

इश्क़ में उसने कुछ ऐसा गुनाह कर दिया, मुझको कैद करके खुद को आज़ाद कर दिया, मैं उसकी जुल्फों की घनी चादर में खुद को छिपाता रहा, उसकी कातिल अदा ने मेरी तबियत नासाज़ कर दिया। ©नीतिश तिवारी।

एक उम्मीद फिर से।

कैसे उसके दिल में अपना प्यार जगाऊँ फिर से, कैसे उसके दिल में नयी आरज़ू जगाऊँ फिर से, वो कहती है मोहब्बत अब ख़त्म हो चुकी है , कैसे अपनी मोहब्बत को वापस लाऊँ फिर से।  ‍ ©नीतिश तिवारी ।

हया वाली अदा।

तेरी हया वाली अदा को सलाम हम करेंगे, तुम लिखना अपनी दास्तान कलाम हम पढ़ेंगे, तुम मानो या ना मानो मोहब्बत तो अब हो ही गयी है, बनकर रह जाएंगे कहानी या नया इतिहास हम लिखेंगे। ©नीतिश तिवारी ।

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