अगर शब्दों में पिरो दूँ तुम्हें तो मेरी अमृता हो तुम, इज़हार कैसे करूँ, चुनावी आचार संहिता हो तुम। इंतज़ार की घड़ी खत्म हुई अब ऐत…
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