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तो फिर तोता कौन है?




केवल यही भ्रम था 
उसके और मेरे दरमियाँ
कि दोनों की जान
एक दूसरे में बसती है
 तो फिर तोता कौन है?

मैं गीले मिट्टी की महक
से भी प्रेम करता हूँ
तुम तो फिर भी गुलाब थी
मुझ पर काँटा होने का इल्ज़ाम
तुमने क्यों लगाया?

©नीतिश तिवारी।



 

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