कल साँसों को फ़िक्र
हो रही थी तुम्हारी
आज धड़कनों ने
ये पैगाम भेजा है

शहर से मुझे हमेशा
शिकायत रही है
गाँव से माँ ने इस
बार आम भेजा है

©नीतिश तिवारी।