Latest

6/recent/ticker-posts

Aur phir Log Waah Waah Karte Hain!

 

Aur phir log waah waah karte hain




शीशे का दिल था, धोखा मिला और टूट गए,
न जाने कौन सी ख़ता हुई जो वो हमसे रूठ गए, किस्से, कहानी, शायरी, ग़ज़ल ये सब दिल बहलाने को अच्छा है,
मुझसे दूर होकर, वो मेरी खुशियों का खजाना लूट गए।

Sheeshe ka dil tha, dhokha mila aur tut gaye,
Na jane kaun si khata huyi jo wo humse rooth gaye,
Kisse, kahani, shayari, ghazal, ye sab dil bahlane ko achchha hai,
Mujhse door hokar wo meri khushiyon ka khajana loot gaye.


दिल टूटता है आवाज नहीं आती,
लोगों को खबर भी नहीं रहती।
फिर मैं कविता लिखता हूँ,
कुछ शेर कहता हूँ,
एक ग़ज़ल बन जाती है,
कुछ नज़्म गुनगुनाता हूँ,
अपने आँसू पोछता हूँ,
उनके 
दिए दर्द समेटता हूँ,

और फिर...
लोग वाह-वाह करते हैं!

Dil Tutta Hai, Awaaz nahin aati.
Logon ko khabar bhi nahin rahti.
Phir main Kavita likhta hun,
Kuchh sher Kahta hun.
Ek Ghazal Ban Jaati Hai,
Kuchh nazm gungunata hun,
Apne Aanshu pochhta hun,
Unke diye Dard sametta hun,
Aur phir Log Waah Waah Karte Hain!


तुम रही थी कभी मेरी प्रेमिका,
आज हो तुम किसी की अर्धांगिनी,
तुम देना उसको खूब संजीवनी।
हमारा क्या, हम तो तुम्हारे दिए हुए
विष को पीकर नीलकंठ हो गए,
लेकिन तुम कभी चिंता मत करना।

तुम्हारी जिंदगी में
सिर्फ अमृत वर्षा हो!
ऐसी ही हम कामना करेंगे।
तुझको हमेशा अपना कहेंगे,
तुझको हमेशा अपना कहेंगे।

Tum rahi thi Kabhi Meri Premika,
Aaj Ho Tum Kisi Ki Ardhangini,
Tum Dena usko Khoob Sanjivani.
Hamara kya, Hum toh Tumhare diye Hue, Vish ko pikar Neelkanth ho gaye.
lekin tum Kabhi Chinta Mat Karna,

Tumhari Jindagi Mein,
Sirf Amrit Varsha Ho!
Aisi hi hum Kamnaa Karenge,
Tujhko Hamesha Apna Kahenge,
Tujhko Hamesha Apna Kahenge.


©नीतिश तिवारी।

ये भी पढिए: क्योंकि खुश रहना है जरूरी।


ये भी देखिए:







Post a Comment

20 Comments

  1. बहुत बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

      Delete
  2. बहुत खूब
    अभट अच्छी रचना।

    नई पोस्ट गुजरे वक़्त में से...

    ReplyDelete
  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (07-03-2021) को    "किरचें मन की"  (चर्चा अंक- 3998)     पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

    ReplyDelete
    Replies
    1. मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

      Delete

पोस्ट कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएँ और शेयर करें।