Thursday, July 30, 2020

कोई किसी का ना हुआ, कोई सबका हो गया।


Sad dard shayari




खुशियों की आस थी,
गम दरवाजे पर दस्तक दे गया।
हमने किसी का बुरा ना चाहा,
फिर भी हमारे साथ बुरा हो गया।
कहते हैं लोग कि
यही किस्मत का खेल है।
कोई किसी का ना हुआ,
कोई सबका हो गया।

Khushiyun ki aas thi,
Gham darwaje par dastak de gaya.
Humne kisi ka bura na chaha,
Phir bhi humare saath bura ho gaya.
Kahte hain log ki 
yahi kismat ka khel hai.
Koi kisi ka naa hua,
Koi sabka ho gaya.

©नीतिश तिवारी।

6 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार (०१-०८ -२०२०) को 'बड़े काम की खबर'(चर्चा अंक-३७८०) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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    1. मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  2. यही किस्मत का खेल है... बहुत खूब ..चंद लाइनों में दुन‍िया समेट ली आपने नीत‍िश जी

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  3. सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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