Friday, April 24, 2020

तुम्हारी याद आती है।

Pic credit: Pinterest.








गाँव में रहूँ
तो शहर की
याद आती है

शहर में रहूँ 
तो गाँव की
याद सताती है

इन दो यादों के बीच
मैं तुम्हें फोन कर लेता हूँ
और मेरी शाम यूँ ही
गुजर जाती है

Gaon mein rahu
Toh shahar ki
Yaad aati hai

Shahar mein rahu 
Toh gaon ki
Yaad satati hai

Inn do yadon ke beech
Main tumhen phone kar leta hu
Aur meri shaam yu hi 
Gujar jaati hai

©नीतिश तिवारी।

14 comments:

  1. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (26-04-2020) को     शब्द-सृजन-18 'किनारा' (चर्चा अंक-3683)    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    --
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    Replies
    1. रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  3. वाह!!!!
    क्या बात....
    बहुत लाजवाब।

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  4. बहुत खूब..... ,सादर नमन

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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