Hindi poem on Rose Day

happy rose day








एक तमन्ना तुम्हें गुलाब देने की,
एक झिझक तुम्हारे मना करने की,
साल दर साल गुजरते गए,
कई गुलाब खिले कई मुरझा गए,
पर ख्वाहिश आज भी जिंदा है,
कि इस बार तुम्हें गुलाब दे ही दूँ,
इस बार तुम्हें कह ही दूँ,
कि मेरा प्यार किसी दिन,
का मोहताज नहीं।

Ek tamanna tumhe gulab dene ki
Ek jhijhak tumahre mana karne ki
Saal dar saal gujarte gaye
Kai gulaab khile kai murjha gaye
Par khwahish aaj bhi zinda hai
Ki iss baar tumhe gulab de hi du
Iss baar tumhen kah hi du
Ki mere pyar kisi din 
Ka mohtaz nahin hai

©नीतिश तिवारी।

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Comments

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 07 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

      Delete
  2. .. वाह मन में हौसले और कभी ना खत्म होने वाला जोश हो तो एक कवि ऐसी ही खूबसूरत रचनाओं का सृजन करता है..।
    कम शब्दों में बहुत कुछ लिख दिया आपने बधाई

    ReplyDelete
  3. .. वाह मन में हौसले और कभी ना खत्म होने वाला जोश हो तो एक कवि ऐसी ही खूबसूरत रचनाओं का सृजन करता है..।
    कम शब्दों में बहुत कुछ लिख दिया आपने बधाई

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