Friday, February 7, 2020

Hindi poem on Rose Day

happy rose day








एक तमन्ना तुम्हें गुलाब देने की,
एक झिझक तुम्हारे मना करने की,
साल दर साल गुजरते गए,
कई गुलाब खिले कई मुरझा गए,
पर ख्वाहिश आज भी जिंदा है,
कि इस बार तुम्हें गुलाब दे ही दूँ,
इस बार तुम्हें कह ही दूँ,
कि मेरा प्यार किसी दिन,
का मोहताज नहीं।

©नीतिश तिवारी।

6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 07 फरवरी 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद।

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  2. .. वाह मन में हौसले और कभी ना खत्म होने वाला जोश हो तो एक कवि ऐसी ही खूबसूरत रचनाओं का सृजन करता है..।
    कम शब्दों में बहुत कुछ लिख दिया आपने बधाई

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  3. .. वाह मन में हौसले और कभी ना खत्म होने वाला जोश हो तो एक कवि ऐसी ही खूबसूरत रचनाओं का सृजन करता है..।
    कम शब्दों में बहुत कुछ लिख दिया आपने बधाई

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