Saturday, 29 June 2019

तुम्हें पता है?

























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मैं अपनी हर बात यूं ही तुमसे नहीं कहता ..
तुम्हें पता है .?? जब मैं तुम्हारे पास होता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

तुम्हें खोने का ख्याल आते ही ..
आंसू बहाता हूं पैर पटकता हूं ..
जुल्फें बिखर जाती हैं चेहरा बिगड़ आता है..
ये बेचैनी मैं यूं ही नहीं सेकता
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे याद करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

दिल की गुल्लक में तेरी हर यादें सहेजे रखा हूं
पर तेरी बेपरवाही देख मैं हक्का-बक्का हूं
जब भी आईने के आगे जाता हूं
तो अपने सामने तुझे ही पाता हूं।।
हवाओं के साथ मैं अब यूं ही नहीं बहता 
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे मेहसूस करता हूं 
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

जब तू सामने से गुजरती है..
मेरी जान पर आ पड़ती है
मिसाल है तू खुदा की बेहतरीन कारीगरी की
तुझे देखना मानो दीदार हो किसी परी की..
इश्क, मोहब्बत, चाहत का पहाड़ यूं ही नहीं मुझपे ढेहता।।
तुम्हें पता है.?? जब मैं तुझे देखता हूं..
तो मैं!! मैं नहीं रहता।

©शांडिल्य मनीष तिवारी।

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (01-07-2019) को " हम तुम्हें हाल-ए-दिल सुनाएँगे" (चर्चा अंक- 3383) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर।

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