पहली धूप से लेकर,
आख़िरी बरसात तक.
ठंडी सुबह से लेकर,
सुहानी शाम तक.
मैं सिर्फ़ तुम्हें चाहूँगा.

फूलों की बगियों से,

बसंत के पतझड़ तक.
रेत के रेगिस्तान से.
बादल के बरखा तक.
मैं सिर्फ़ तुम्हें चाहूँगा.

©नीतिश तिवारी।