फिर से वो धुरंधर आएगा,
फिर से वो मंजर आएगा,
सूखी हुई बंजर में,
फिर से वो समंदर आएगा।


ना रुकना तुम्हे,

ना थमना तुम्हे,
बस चलते जाना है।
हार नहीं अल्प विश्राम है ये,
ज़िन्दगी का एक मुकाम है ये।

हार गए तो क्या हुआ,

जज्बा तो हमने दिखाया है,
हर मुश्किल में हर क्षण में,
सबके दिल को लुभाया है।

मन तो उदास बहुत है आज,

पर कल करेंगे फिर से प्रयास,
फिर से जमकर तैयारी होगी,
तब जीत सिर्फ हमारी होगी।

फिर से वो धुरंधर आएगा,

फिर से वो मंजर आएगा,
सूखी हुई बंजर में,
फिर से वो समंदर आएगा।

©नीतिश तिवारी।